बीसलदेव रास | Bisaldev Ras

- श्रेणी: इतिहास / History भारत / India साहित्य / Literature
- लेखक: माता प्रसाद गुप्त - Mataprasad Gupt
- पृष्ठ : 359
- साइज: 10 MB
- वर्ष: 1970
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दो शब्द :
"बीसलदेव रास" हिंदी का एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसे स्वस्थ प्रेम की एक सुंदर गाथा के लिए जाना जाता है। इसे हिंदी के सबसे प्राचीन ग्रंथों में से एक माना जाता है, लेकिन इसके बारे में हाल के वर्षों में विभिन्न विचार सामने आए हैं। बीसलदेव रास की प्राचीनता पर विवाद है। कुछ इतिहासकारों ने इसे हिंदी का सर्वप्रथम ग्रंथ बताया है, जबकि अन्य ने इसके लेखक की योग्यता पर सवाल उठाए हैं। राजस्थानी साहित्य के इतिहास में इसे साधारण कवि की रचना माना गया। हालाँकि, इसके माध्यम से हिंदी भाषा के विकास के प्रारंभिक स्वरूप को समझा जा सकता है। श्री अगरचंद नाहटा ने इस ग्रंथ की प्राचीनता को अस्वीकार करते हुए इसे सोलहवीं या सत्रहवीं शताब्दी का बताया। इसके बाद स्वर्गीय गौरीशंकर हीराचंद ओझा ने नाहटा के विचारों का उत्तर देने का प्रयास किया। इस प्रकार के मतों से यह स्पष्ट होता है कि राजस्थानी विद्वानों को अपने प्राचीन ग्रंथों के विषय में मोह नहीं है, और इसे साहित्यिक दृष्टि से मूल्यांकन करना कठिन है। ग्रंथ की विभिन्न प्रतियों में पाठ के भेद हैं, जिससे यह पता चलता है कि समय के साथ इसकी पाठ परंपरा विकृत हो गई है। कुल मिलाकर, "बीसलदेव रास" के मूल्यांकन के लिए पाठ-निर्धारण की आवश्यकता है ताकि इसके वास्तविक रूप को समझा जा सके।
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