तुम्हारे लिए | Tumhare Liye

By: हिमांशु जोशी - Himanshu Joshi
तुम्हारे लिए | Tumhare Liye by


दो शब्द :

इस पाठ में लेखक हिर्माशु जोशी अपनी भावनाओं और अनुभवों के माध्यम से एक गहरी सोच में डूबे हुए हैं। वह एक हवाई अड्डे पर खड़े होकर एक महिला के विमान उड़ान भरने के क्षण का जिक्र करते हैं। लेखक को यह विश्वास नहीं होता कि वह महिला अब उनके साथ नहीं है और यह सब एक सपना है। उन्होंने महिला के पीछे मुड़कर देखने, विमान में चढ़ने और उसके जाने के समय की अनुभूतियों का वर्णन किया है। लेखक अपनी यादों में लौटते हैं, जब उन्होंने पहली बार उस महिला को देखा था। उस समय वह कॉलेज में पढ़ाई कर रहे थे और उनकी जिंदगी में कई कठिनाइयाँ थीं। उनका परिवार आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा था, और उन्होंने पढ़ाई जारी रखने का निर्णय लिया। लेखक अपने मित्र सुहास के साथ मिलकर ट्यूशन पढ़ाने का काम शुरू करते हैं, जिसका ज़िक्र भी उन्होंने किया है। महिला के परिवार की स्थिति, उसकी शिक्षा के प्रति उसके पिता की उम्मीदें और लेखक के प्रति उसकी भावनाओं का जिक्र भी पाठ में है। लेखक उस महिला के प्रति अपनी भावनाओं का भी अनुभव करते हैं, जिसे वह समझ नहीं पाते, और यह सब एक रहस्य की तरह उनके लिए बना रहता है। लेखक की भावनाएं, उनकी यादें और उनके विचार मिलकर इस पाठ को एक गहरी संवेदनशीलता से भर देते हैं, जहाँ प्यार, खोने का डर और जीवन की जद्दोजहद का चित्रण किया गया है।


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