सरल शरीर विज्ञानं | Saral Sharir Vigyan

By: नारायणदास बाजोरिया - Narayandas Bajoriya


दो शब्द :

इस पाठ में लेखक ने एक पुस्तक के प्रकाशन की प्रक्रिया और उसके पीछे की प्रेरणाओं का वर्णन किया है। लेखक बताता है कि जब वह विद्यालय में पढ़ता था, तब उसके शिक्षक ने उसे कुछ विज्ञान की पुस्तकें पढ़ने के लिए दी थीं, जिससे उसे विज्ञान के सिद्धांतों को समझने में मदद मिली। इसके बाद लेखक ने सोचा कि अगर विज्ञान की विभिन्न विषयों की पुस्तकें हिंदी में प्रकाशित की जाएं, तो सामान्य लोगों और छात्रों को बेहतर समझ में आएगी। लेखक ने उन विषयों की सूची भी दी है, जिन पर पुस्तकें प्रकाशित करने की योजना बनाई गई थी, जैसे कि भौतिकी, रसायन शास्त्र, भूगोल, आदि। वह यह भी बताते हैं कि अंग्रेजी में इन विषयों पर कई संस्करण प्रकाशित हो चुके हैं, जो इस बात का प्रमाण हैं कि ये विषय महत्वपूर्ण हैं। लेखक ने अपने मित्रों के साथ मिलकर एक समिति बनाई और उन्होंने पहले कुछ पुस्तकों का अनुवाद किया, जिन्हें पाठकों ने पसंद किया। इसके बाद, उन्होंने और पुस्तकें प्रकाशित करने का संकल्प लिया। लेखक का मानना है कि हिंदी में अच्छी और सस्ती पुस्तकें प्रकाशित करने की आवश्यकता है, ताकि अधिक से अधिक लोग ज्ञान प्राप्त कर सकें। उन्होंने इस कार्य के लिए अच्छे कागज और प्रिंटिंग का उपयोग करने का निर्णय लिया, ताकि पुस्तकों की गुणवत्ता बनी रहे। लेखक ने यह भी बताया कि उन्होंने अपने पुराने अनुभवों और प्रयासों को साझा किया, ताकि पाठकों को समझ में आए कि यह पहल क्यों आवश्यक थी। अंत में, लेखक ने पाठकों से निवेदन किया कि वे पुस्तक में दी गई जानकारी का उपयोग करें और अपने सुझाव दें, ताकि अगली पुस्तकों में सुधार किया जा सके। इस प्रकार, यह पाठ विज्ञान की शिक्षा को हिंदी में सरलता से प्रस्तुत करने के उद्देश्य और उसके पीछे की प्रेरणा को दर्शाता है।


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