भारतीय वास्तुकला का इतिहास | Bhartiya Vastukala ka Itihas

- श्रेणी: Art and Architecture | कला और वास्तुकला इतिहास / History भारत / India
- लेखक: कृष्णदत्त बाजपेयी - Krishndatt Bajpeyi
- पृष्ठ : 228
- साइज: 5 MB
- वर्ष: 1972
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दो शब्द :
भारतीय वास्तुकला का इतिहास एक महत्वपूर्ण विषय है, जिसमें प्राचीन भारतीय सभ्यताओं और उनके स्थापत्य कला के विकास का अध्ययन किया जाता है। इस इतिहास में हड़प्पा सभ्यता का विशेष स्थान है, जो सिंधु घाटी में विकसित हुई थी। हड़प्पा और मोहनजोदड़ो जैसे स्थानों पर आयोजित उत्खननों से यह स्पष्ट हुआ है कि यहां ईसा से लगभग तीन हजार वर्ष पूर्व व्यवस्थित नगरों का निर्माण हुआ था। हड़प्पा सभ्यता के निर्माण में एक अद्वितीय वास्तुकला और योजना देखी गई, जिसमें ईंटों का प्रयोग, सड़कों का निर्माण, और जल निकासी की प्रणाली शामिल थी। इस सभ्यता की वास्तुकला में सरलता और कार्यक्षमता का ध्यान रखा गया था। हड़प्पा के निवासी एक संगठित और उन्नत समाज का निर्माण कर चुके थे, जिसमें प्रशासन, व्यापार, और धार्मिक मान्यताएँ सभी एकीकृत थीं। हड़प्पा के स्थापत्य में कुछ विशेषताएँ थीं जैसे कि दीवारों का निर्माण पक्की ईंटों से किया गया था, और अनेक मंजिलों वाले भवन बनाए गए थे। इसके अलावा, हड़प्पा सभ्यता में पूजा स्थलों या मंदिरों की कमी देखी गई, जिससे यह संकेत मिलता है कि उनकी धार्मिक प्रथाएं भिन्न थीं। भारतीय वास्तुकला का इतिहास इस सभ्यता की खोजों से समृद्ध हुआ है, जो बाद में अन्य भारतीय सांस्कृतिक और स्थापत्य विकासों का आधार बनी। इस प्रकार, भारतीय वास्तुकला का इतिहास प्राचीन समय से लेकर आधुनिक युग तक के विकास को दर्शाता है, जिसमें विभिन्न सांस्कृतिक प्रभावों का समावेश है।
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