संताल-संस्कार की रुपरेखा | Santal- Sanskar Ki Ruprekha

By: उमाशंकर - Umashankar
संताल-संस्कार की रुपरेखा | Santal-  Sanskar Ki Ruprekha by


दो शब्द :

इस पाठ में "संताल संस्कार की रूपरेखा" नामक पुस्तक का परिचय दिया गया है, जो लेखक उमाशंकर द्वारा लिखी गई है। यह पुस्तक संताली संस्कृति, उनके रीति-रिवाज, सामाजिक जीवन, और उनकी भाषा और साहित्य पर एक व्यापक अध्ययन प्रस्तुत करती है। लेखक ने संतालों के गोत्र, जन्म, विवाह, धर्म, विध्वास, कला-कौशल, और समाज-व्यवस्था के बारे में विस्तृत जानकारी दी है। पुस्तक में संतालों के जीवन-दर्शन, उनकी धार्मिक मान्यताएँ, और विभिन्न पर्वों का महत्व भी दर्शाया गया है। लेखक ने इस पुस्तक के माध्यम से संताली समाज के जनजीवन को समझने का प्रयास किया है, जिससे पाठक इस समुदाय के बारे में नई जानकारियाँ प्राप्त कर सकते हैं। पुस्तक का महत्व इस बात में भी है कि यह हिंदी में संताली संस्कृति का एक बड़ा और महत्वपूर्ण दस्तावेज है, जो पहले अंग्रेजी में ही उपलब्ध था। लेखक ने अपने शोध और अनुभव के आधार पर संताली संस्कृति को प्रस्तुत किया है, जिससे पाठकों को उनके जीवन, आचार, और सांस्कृतिक धरोहर के बारे में जानकारी मिलती है। इस पुस्तक के माध्यम से लेखक ने संताली समाज की पहचान को उजागर किया है और उनके साथ सहानुभूति और समझ की आवश्यकता को भी रेखांकित किया है। यह पुस्तक न केवल सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह सामाजिक समरसता और आपसी समझ को बढ़ाने में भी सहायक होगी।


Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *