मन की अपार शक्ति | Man Ki Apar Shakti

- श्रेणी: Vedanta and Spirituality | वेदांत और आध्यात्मिकता साहित्य / Literature हिंदी / Hindi
- लेखक: केदारनाथ गुप्त - Kedarnath Gupta
- पृष्ठ : 74
- साइज: 1 MB
- वर्ष: 1956
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दो शब्द :
इस पाठ में मानव मन की अपार शक्ति के बारे में चर्चा की गई है। लेखक जेम्स एलेन और उनकी पत्नी लिली के विचारों को साझा करते हुए बताते हैं कि मनुष्य के भीतर एक अद्वितीय रचनात्मक क्षमता है, जिसका सही उपयोग करके वह अपने जीवन को सकारात्मक दिशा में मोड़ सकता है। मन को वश में करने की क्षमता पर जोर दिया गया है और यह बताया गया है कि मन की स्वतंत्रता और अनियंत्रितता व्यक्ति के समय और ऊर्जा को बर्बाद कर सकती है। पाठ में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अगर मनुष्य अपने विचारों को नियंत्रित कर सके, तो वह अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। लेखक ने सुझाव दिया है कि सुबह का समय मन को केन्द्रित करने के लिए सबसे उपयुक्त है। धीरे-धीरे ध्यान और एकाग्रता को विकसित करने पर जोर दिया गया है, जिससे व्यक्ति अपने लक्ष्यों को साध सकता है। साथ ही, पाठ में यह भी कहा गया है कि मन की रचनात्मक शक्ति जीवन में नये विचारों और संभावनाओं को उत्पन्न करने की क्षमता रखती है। यह शक्ति केवल बाहरी परिस्थितियों पर निर्भर नहीं करती, बल्कि व्यक्ति के भीतर ही विद्यमान है। यदि मन को सही दिशा में लगाया जाए, तो यह व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है और उसे उसके लक्ष्यों की ओर अग्रसर कर सकता है। अंत में, लेखक ने यह बताया कि मन की शक्ति का सही उपयोग करने से व्यक्ति अपने जीवन को समृद्ध और सफल बना सकता है, और यह सब उसके अपने विचारों और इच्छाओं पर निर्भर करता है।
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