वेदार्थ संग्रह | Vedartha Sangrah

- श्रेणी: संस्कृत /sanskrit साहित्य / Literature
- लेखक: राम मिश्र शास्त्री - Ram Mishra Shastri
- पृष्ठ : 259
- साइज: 29 MB
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दो शब्द :
इस पाठ का सारांश इस प्रकार है: "VEDARTHA SAMGRAHA" एक महत्वपूर्ण संस्कृत ग्रंथ है जिसे "तात्पर्यदीपिका" नामक व्याख्या के साथ प्रस्तुत किया गया है। इस ग्रंथ का संपादन सुडगणश्री द्वारा और टिप्पणी स्नेहपूर्ण्ति के साथ किया गया है, जो कि बनारस के संस्कृत कॉलेज के प्रोफेसर, श्री रामामिश्र शास्त्री द्वारा संपादित है। इस ग्रंथ में वेदों के अर्थ और उनके गहन विचारों को संक्षेप में बताया गया है। इसे 29 दिसंबर 2012 को हरी पार्शद दास द्वारा अपलोड किया गया था। ग्रंथ की संरचना के माध्यम से, यह वेदों के ज्ञान को समझने और व्याख्या करने में सहायता करता है। यह ग्रंथ भारतीय दर्शन और वेदांत के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है, जो विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए अत्यंत उपयोगी है। इसमें विभिन्न शास्त्रों का संदर्भ और उनके अर्थ को समझाने का प्रयास किया गया है, जिससे पाठक वेदों का गहन ज्ञान प्राप्त कर सकें। इस प्रकार, "VEDARTHA SAMGRAHA" भारतीय संस्कृति और दर्शन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, जिसे शिक्षण और अनुसंधान के लिए एक मूल्यवान संसाधन के रूप में देखा जाता है।
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