श्रीमद्भगवद्गीता | Sri Bhagavad Geeta

By: अभिनव देशिका - Abhinava Deshika
श्रीमद्भगवद्गीता  | Sri Bhagavad  Geeta by


दो शब्द :

यह पाठ "उभयवेदान्तग्रन्थ माला" का एक अंश प्रतीत होता है, जिसमें भारतीय दर्शन, विशेषकर वेदांत और गीता के सिद्धांतों का संदर्भ है। इसमें वेदांत की जटिलताओं और गूढ़ अर्थों को समझाने का प्रयास किया गया है। पाठ में कर्मयोग, भक्ति, और ज्ञान के महत्व पर जोर दिया गया है। श्रीमद्भगवद्गीता के विचारों के माध्यम से यह दर्शाया गया है कि जीवन में कार्य करना आवश्यक है, लेकिन वही कार्य जब भगवान की भक्ति के साथ किया जाए तो उसका फल शुभ होता है। कर्मों का फल और व्यक्ति के कर्तव्यों का पालन कैसे किया जाए, इस पर भी चर्चा की गई है। पाठ में ध्यान, साधना, और आत्मज्ञान की आवश्यकता को भी रेखांकित किया गया है, जिससे व्यक्ति अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान सके। इसके साथ ही यह भी बताया गया है कि कर्मों का सही ज्ञान और भक्ति से जुड़े रहना व्यक्ति को उसके अंतर्मन की शांति और सच्ची खुशी प्रदान करता है। इस प्रकार, यह पाठ भारतीय दार्शनिकता और वेदांत के गहरे सिद्धांतों का सार प्रस्तुत करता है, जो जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझने में सहायक है।


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