रत्नावली नाटिका | Ratnavali Natika

- श्रेणी: नाटक/ Drama संस्कृत /sanskrit साहित्य / Literature
- लेखक: श्री हर्षदेव - Shri Harshdev
- पृष्ठ : 268
- साइज: 804 MB
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दो शब्द :
इस पाठ में भारतीय इतिहास के एक प्रमुख राजा हर्षवर्धन और उनके समय की घटनाओं का वर्णन है। हर्षवर्धन का शासनकाल समृद्धि और सांस्कृतिक विकास का समय माना जाता है। पाठ में उल्लेखित घटनाएं उनके शासन के दौरान के संघर्षों, उनकी नीति और उनके प्रशासन की कार्यप्रणाली को दर्शाती हैं। राज्यवर्धन और हर्षवर्धन के बीच संवाद और उनके संघर्षों का उल्लेख है। राज्यवर्धन की एक पत्नी, राज्यश्री, आत्मदाह के प्रयास में थी, जिसे हर्षवर्धन ने रोकने का प्रयास किया। राज्यश्री ने फिर भी संसार में लौटने की इच्छा नहीं जताई और ब्रह्मचारिणी बनकर रहने का निर्णय लिया। राज्यवर्धन के बाद, हर्षवर्धन ने अपने शासन में कई युद्ध लड़े, जिसमें उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों को हराया और अपने राज्य का विस्तार किया। उनके शासन के दौरान, विद्वानों और कवियों को संरक्षण मिला, और उनके दरबार में वाणभट और मयूर जैसे कवि थे। हर्षवर्धन के समय चीनी पर्यटक त्सेनसांग का आगमन भी हुआ, जिसने हर्षवर्धन के शासन को वीरता और बुद्धिमत्ता से भरा हुआ बताया। पाठ में यह भी उल्लेख है कि हर्षवर्धन ने धार्मिक गतिविधियों में भाग लिया और दान दिया, जिससे उनकी दयालुता और धार्मिक प्रवृत्ति का परिचय मिलता है। उनके शासन में करों की दरें कम थीं और लोग सुखी थे। अंत में, पाठ में हर्षवर्धन के साहित्यिक योगदान का भी उल्लेख है, जिसमें उनके द्वारा लिखित नाटक "रत्नावली" और अन्य ग्रंथों की चर्चा की गई है। यह बताया गया है कि हर्षवर्धन केवल एक योद्धा नहीं बल्कि एक महान लेखक और कवि भी थे, जिन्होंने अपने समय के सांस्कृतिक जीवन को समृद्ध किया।
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