भगवान महावीर स्मृति ग्रन्थ | Bhagwan Mahavir smriti Granth

- श्रेणी: जैन धर्म/ Jainism साहित्य / Literature
- लेखक: सुमेरचंद जैन - Sumerchand Jain
- पृष्ठ : 488
- साइज: 34 MB
- वर्ष: 1976
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दो शब्द :
भगवान महावीर के जीवन का सारांश इस प्रकार है। उनका जन्म राजकुमार सिद्धार्थ के रूप में हुआ था और उनका विवाह राजकुमारी त्रिशला से हुआ। लेकिन उन्होंने गृहस्थ जीवन को त्यागकर तपस्वी जीवन अपनाने का निर्णय लिया। महावीर ने 30 वर्ष की आयु में सभी भौतिक सुखों का त्याग किया और ध्यान में लीन हो गए। उन्होंने अहिंसा, सत्य और अपरिग्रह का मार्ग बताया, जिससे भारतीय संस्कृति में क्रांतिकारी बदलाव आया। महावीर का जीवन एक महाकाव्य के समान था, जिसमें अनेक विरोधाभास और संघर्ष थे। उनका जीवन केवल भौतिक घटनाओं से परे था; वे आत्मा की गहराई में जाकर जीवन का अनुभव कर रहे थे। उनके विचारों ने धर्म को किसी विशेष वर्ग की संपत्ति नहीं बनने दिया, बल्कि सभी के लिए सुलभ बना दिया। महावीर के जीवन की गहराई को समझने के लिए भौतिकता से परे जाकर उनकी चेतना को समझना आवश्यक है। वे अपने जीवन में व्यापकता लेकर आए, जिससे उनके अनुयायी भी इस दिशा में आगे बढ़ सके। महावीर ने जैन धर्म को स्थापित किया, जो अज्ञानता, हिंसा और सामाजिक भेदभाव के खिलाफ था। उनकी शिक्षाएँ आज भी प्रासंगिक हैं और वे मानवता के लिए मार्गदर्शक हैं। महावीर का जीवन एक प्रेरणा है, जो हमें सत्य, अहिंसा और आत्मज्ञान की ओर अग्रसर करता है।
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