जायसी ग्रंथावली | Jaisi Granthawali

By: रामचन्द्र शुक्ल - Ramchandar Shukla
जायसी ग्रंथावली | Jaisi Granthawali by


दो शब्द :

इस पाठ में जायसी के काव्य 'पदमावत' के विभिन्न संस्करणों की समीक्षा की गई है। पहले संस्करण में कुछ शुद्धियाँ और भूलें थीं, जिन्हें नए संस्करण में सुधारने का प्रयास किया गया है। इसमें सूफी भक्ति मार्ग और भारतीय भक्तिमार्ग के स्वरूप को समझने के लिए कुछ नई बातें जोड़ी गई हैं। पं. चंद्रबली पॉडेय ने जायसी और अन्य सूफी कवियों के जीवन के बारे में नई जानकारियाँ प्रदान की हैं। 'पदमावत' को हिंदी के सर्वोत्तम प्रबंध-काव्यों में से एक माना गया है, लेकिन इसके अध्ययन में कठिनाइयाँ हैं क्योंकि इसकी भाषा पुरानी और गूढ़ है। इसके विभिन्न संस्करणों की चर्चा की गई है, जिनमें से कुछ असंतोषजनक हैं। उदाहरण के लिए, एक संस्करण में पाठ की शुद्धता का अभाव था, जबकि दूसरे में अर्थ को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया था। जायसी की कविता में इस्लाम और सूफी विचारधारा का गहरा प्रभाव है, और इसमें न्याय, पाप और पुण्य की चर्चा की गई है। जायसी ने अपने समय के धार्मिक विचारों और सूफी संतों के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की है। उन्होंने अपने जीवन में साधु और भक्ति का अनुसरण किया और समाज में समानता के सिद्धांतों को अपनाया। कुल मिलाकर, इस पाठ में 'पदमावत' के साहित्यिक मूल्य, उसकी भाषा, और विभिन्न संस्करणों की आलोचना की गई है, साथ ही जायसी की जीवनशैली और उनके काव्य में निहित विचारों का भी उल्लेख किया गया है।


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