हिंदी उपन्यास बदलते परिप्रेक्ष्य | Hindi Upanyas Badalte Pariprekshya

- श्रेणी: उपन्यास / Upnyas-Novel साहित्य / Literature
- लेखक: प्रेम भटनागर - Prem Bhatanaagar
- पृष्ठ : 396
- साइज: 17 MB
- वर्ष: 1961
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दो शब्द :
इस शोध-प्रबंध में उपन्यास शिल्प के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया है। उपन्यास का स्वरूप, लक्ष्य, शैली और औपस्यासिक तत्त्वों का शिल्प पर प्रभाव जैसे महत्वपूर्ण प्रश्नों पर चर्चा की गई है। इसमें यह भी देखा गया है कि नए शिल्प ने उपन्यासकारों की रचनाओं में कैसे नए दृष्टिकोण और दिशा प्रदान की है। लेखक का मानना है कि शिल्प में परिवर्तन केवल असंगति नहीं है, बल्कि विकास का परिणाम है। प्रेमचंद से लेकर समकालीन लेखकों तक, जिन्होंने उपन्यास सर्जन की विधि को स्थापित किया, उनके योगदान का मूल्यांकन किया गया है। प्रेमचंद ने उपन्यास को जीवनगत समस्याओं से जोड़ा और इसे केवल मनोरंजन का साधन नहीं रहने दिया। उपन्यास के शिल्प का विकास वर्णनात्मक से विश्लेषणात्मक और फिर प्रतीकात्मक की ओर हुआ है। विभिन्न अध्यायों में उपन्यास साहित्य और शिल्प के संबंध, विभिन्न शिल्प विधियों के उपयोग, और उपन्यासकारों द्वारा अपनाए गए नए प्रयोगों की चर्चा की गई है। अंत में, उपन्यास शिल्प की उपयोगिता और इसके भविष्य की दिशा पर विचार किया गया है। इस शोध-प्रबंध में उपन्यास के भूत, भविष्य और वर्तमान को शिल्प के संदर्भ में समझाने का प्रयास किया गया है। लेखक ने अपने मार्गदर्शक और सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने इस कार्य में सहायता की।
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