भारतीय ज्योतिष का इतिहास | Bhartiya Jyotish Ka Itihas

- श्रेणी: इतिहास / History ज्योतिष / Astrology दार्शनिक, तत्त्वज्ञान और नीति | Philosophy
- लेखक: गोरख प्रसाद - Gorakh Prasad
- पृष्ठ : 314
- साइज: 9 MB
- वर्ष: 1956
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दो शब्द :
यह पाठ भारतीय ज्योतिष के इतिहास पर आधारित है, जिसमें लेखक गोरख प्रसाद ने ज्योतिष के महत्व और इसके विकास को प्रस्तुत किया है। लेखक ने बताया है कि भारत में ज्योतिष का ज्ञान प्राचीन काल से ही विद्यमान था, और यह ज्ञान न केवल ऋषियों और विद्वानों के लिए, बल्कि सामान्य जनता के लिए भी आवश्यक था। ज्योतिष का अध्ययन हमारे पूर्वजों के लिए जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझने में मददगार था, जैसे कृषि, मौसम, और धार्मिक अनुष्ठान। लेखक ने यह भी उल्लेख किया कि समय की माप के लिए विभिन्न एकाइयों का विकास हुआ, जैसे दिन, मास, और वर्ष। इन एकाइयों का सही ज्ञान प्राप्त करने में समय लगा और यह आवश्यक हो गया कि एक व्यवस्थित ज्योतिष विज्ञान विकसित किया जाए। पाठ में बताया गया है कि प्राचीन भारतीय वेदों में ज्योतिष का उल्लेख किया गया है और यह दर्शाया गया है कि कैसे समाज के विभिन्न वर्गों, जैसे कृषकों और पुजारियों, को ज्योतिष के ज्ञान की आवश्यकता थी। लेखक ने यह भी संकेत किया है कि ज्योतिष की जटिलताओं को समझने के लिए समय का ज्ञान आवश्यक था, और यह ज्ञान धीरे-धीरे विकसित हुआ। अंत में, लेखक ने भारतीय ज्योतिष के इतिहास में विभिन्न महत्वपूर्ण हस्तियों और ग्रंथों का उल्लेख किया है, जो इस क्षेत्र में योगदान देने वाले रहे हैं। यह पुस्तक पाठकों को ज्योतिष के बारे में सरल और स्पष्ट जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से लिखी गई है, ताकि वे इस ज्ञान को आसानी से समझ सकें।
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