योग चिकित्सा | Yoga Chikitsa

By: अत्रिदेव विद्यालंकार - Atridev vidyalankar
योग चिकित्सा | Yoga Chikitsa by


दो शब्द :

इस पाठ का मुख्य उद्देश्य एक ऐसी पुस्तक का निर्माण करना है, जो नए विद्यार्थियों और चिकित्सकों को रोग के अनुसार औषध का चयन करने में सहायता प्रदान करे। लेखक ने महसूस किया कि औषध के चयन के साथ-साथ अनुपान और मात्रा का निर्णय भी महत्त्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि यदि वे सभी विषयों को एक पुस्तक में समाहित करना चाहते, तो पुस्तक का आकार बहुत बड़ा हो जाएगा। इसलिए, उन्होंने योगनिर्माण प्रक्रिया को छोड़कर रोग और अनुपान को मुख्य रूप से शामिल करने का निर्णय लिया, जिससे पुस्तक का आकार नियंत्रित रहे और विषय का विस्तार भी पूरा हो सके। लेखक ने यह भी बताया कि यह पुस्तक हिंदी में पहली बार प्रकाशित हो रही है, जबकि बंगाली में इस विषय पर कुछ पुस्तकें पहले से मौजूद हैं। अनुपान के चुनाव की विशेषता बंगाल के वैद्यों की है, जिससे पुस्तक के विचारों को और समृद्ध किया गया है। लेखक ने विभिन्न वैद्य और चिकित्सकों से प्राप्त ज्ञान और अनुभव का उपयोग किया है, जिससे पुस्तक में समाहित जानकारी अधिक प्रामाणिक और उपयोगी हो सके। पुस्तक के प्रकाशक का भी लेखक ने आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने इस विषय पर प्रकाशन का कार्य किया। कुल मिलाकर, यह पाठ एक महत्वपूर्ण चिकित्सा ग्रंथ की भूमिका की व्याख्या करता है, जो आयुर्वेदिक चिकित्सा में औषधियों और उनके अनुपानों के चयन को सरल और सुलभ बनाने का प्रयास करता है।


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