देवनागरी उर्दू-हिंदी कोष | Devanagari Urdu-Hindi Kosh

- श्रेणी: Cultural Studies | सभ्यता और संस्कृति भाषा / Language साहित्य / Literature
- लेखक: रामचन्द्र वर्मा - Ramchandra Verma
- पृष्ठ : 518
- साइज: 29 MB
- वर्ष: 1948
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दो शब्द :
इस पाठ में शब्द-कोश के महत्व और निर्माण की प्रक्रिया पर चर्चा की गई है। भाषाओं का विकास उनके शब्द-कोश पर निर्भर करता है, और शब्दों का सही और वैज्ञानिक संग्रह भाषा की शुद्धता और व्याकरणिकता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण है। पाठ में संस्कृत के प्राचीन कोशों की विशेषताएँ और ऐतिहासिक पद्धति के तहत शब्दों के विकास का विवरण दिया गया है। शब्द-कोश में शब्दों का क्रम, उनके अर्थ, उच्चारण और व्युत्पत्ति का विस्तृत विवरण होना चाहिए। ऐसे कोशों को तैयार करना एक कठिन कार्य है, लेकिन यह वैज्ञानिक दृष्टिकोण से आवश्यक है ताकि भाषा की शुद्धता और स्पष्टता बनी रहे। इसके साथ ही, यह बताया गया है कि हिंदी और उर्दू के बीच संबंध को मजबूत करने के लिए एक प्रामाणिक हिंदी-उर्दू कोश का निर्माण महत्वपूर्ण है। उर्दू-हिंदी कोश की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए, इसमें उर्दू में प्रयुक्त अरबी और फारसी शब्दों के अर्थ हिंदी में देने का प्रयास किया गया है। इस कोश का उद्देश्य हिंदी और उर्दू भाषाओं के बीच की दूरी को कम करना है, ताकि दोनों भाषाओं के जानने वाले एक-दूसरे के शब्दों का सही अर्थ समझ सकें। इसके अलावा, पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि अन्य भारतीय भाषाओं के शब्दों का हिंदी में समावेश भी आवश्यक है, जिससे हिंदी का स्वरूप और विस्तृत हो सके। अंततः, यह कोश हिंदी प्रेमियों के लिए एक महत्वपूर्ण साधन साबित होगा।
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