आठ एकांकी नाटक | Aath Ekanki Natak

By: रामकुमार वर्मा - Ramkumar Varma
आठ एकांकी नाटक | Aath Ekanki Natak by


दो शब्द :

इस पाठ में आठ एकांकी नाटकों का संग्रह प्रस्तुत किया गया है, जिसे डॉ. रामकुमार वर्मा ने संपादित किया है। यह एकांकी नाटक भारतीय साहित्य में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं, खासकर आधुनिक युग में, जब समय की कमी के कारण बड़े नाटकों के बजाय छोटे नाटकों की आवश्यकता महसूस हुई। एकांकी नाटक संक्षिप्त होते हैं और जीवन की छोटी लेकिन गहन घटनाओं को प्रभावशाली तरीके से प्रस्तुत करते हैं। एकांकी का मुख्य उद्देश्य जीवन की एक छोटी सी घटना को एक ही अंक में प्रस्तुत करना होता है। इसमें लेखक अपनी पूरी कला और प्रतिभा को एक ही घटना में संकेंद्रित करता है, जिससे यह नाटक अधिक मार्मिक और प्रभावशाली बनता है। एकांकी में पात्रों की संख्या सीमित होती है, आमतौर पर चार या पाँच, और इन पात्रों का घटना के साथ गहरा संबंध होना अनिवार्य है। नाटक के संवाद में संक्षिप्तता और प्रभावशीलता होती है, क्योंकि लंबे संवाद एकांकी की गति को धीमा कर सकते हैं। इस संग्रह में शामिल नाटकों में समाज की समस्याओं, पारिवारिक संबंधों और मानवीय भावनाओं का चित्रण किया गया है। जैसे 'अधिकार का रक्षक' में नेता की दोहरी भूमिका को दर्शाया गया है, तो 'माँ-बाप' में माता-पिता के प्यार और त्याग की महत्ता को प्रस्तुत किया गया है। इन नाटकों में संवाद, पात्रों का आंतरिक संघर्ष और सामाजिक संदर्भों का समावेश है, जो इन्हें और भी रोचक बनाता है। कुल मिलाकर, यह संग्रह एकांकी नाटकों की विशेषताओं और उनके महत्व को दर्शाता है, जो कि आधुनिक साहित्य में अपनी जगह बनाए हुए हैं।


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