धर्मशास्त्र संग्रह | Dharmshastra Sangrah

- श्रेणी: ग्रन्थ / granth धार्मिक / Religious साहित्य / Literature
- लेखक: खेमराज श्री कृष्णदास - Khemraj Shri Krishnadas
- पृष्ठ : 630
- साइज: 60 MB
- वर्ष: 1913
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दो शब्द :
इस पाठ में भारतीय धर्मशास्त्र और वेदों के विभिन्न आचार्यों तथा उनके द्वारा स्थापित धर्मशाखाओं का उल्लेख किया गया है। पाठ में विभिन्न ऋषियों और आचार्यों के नाम दिए गए हैं, जैसे मनु, याज्ञवल्क्य, आत्रि, वृहस्पति आदि, जो धर्म के नियमों और आचारों को स्थापित करने के लिए जाने जाते हैं। इसमें यह भी कहा गया है कि धर्म का संग्रह और उसका पालन आवश्यक है, क्योंकि यह मनुष्य के जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मृत्यु के निकटता को ध्यान में रखते हुए, धर्म का पालन करना उचित है। पाठ में यह भी उल्लेखित है कि परलोक में केवल धर्म ही सहायक होता है, जबकि परिवार के सदस्य वहां नहीं होते। इसके अलावा, विभिन्न स्मृतियों और श्रुतियों के आधार पर धर्म की व्याख्या की गई है। धर्म को चार प्रमुख तत्वों में बांटा गया है: वेद, स्मृति, सदाचार और आत्मा की संतुष्टि। पाठ में यह स्पष्ट किया गया है कि मनुष्य को अपने आचार और आचरण में विवेक का उपयोग करना चाहिए और धर्म का पालन करना चाहिए। इस प्रकार, यह पाठ भारतीय धर्मशास्त्र के मूल सिद्धांतों, आचार्यों के योगदान और धर्म के महत्व पर केंद्रित है, जो मानव जीवन को सही दिशा देने में सहायक हैं।
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