सांख्यिकी के सिद्धांत | Sankhiyaki Ke Sidhant

By: देवकीनंदन - Devkinandan
सांख्यिकी के सिद्धांत | Sankhiyaki Ke Sidhant by


दो शब्द :

इस पाठ में सांख्यिकी के सिद्धांत और उनकी उपयोगिता पर चर्चा की गई है। लेखक देवकी नन्दन एलहँस ने बताया है कि आधुनिक युग में सांख्यिकी का महत्व बढ़ गया है और इसे "सांख्यिकी-युग" के रूप में जाना जाता है। स्वतंत्रता के बाद, भारत में आर्थिक विकास की योजनाओं के लिए सांख्यिकी की आवश्यकता महसूस की गई। पुस्तक का उद्देश्य हिंदी में सांख्यिकी के अध्ययन में सहायक होना है, क्योंकि पहले अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई के दौरान विशेष कठिनाइयाँ नहीं थीं, लेकिन अब हिंदी में सामग्री की कमी है। लेखक ने हिंदी में सरल और शुद्ध शब्दों का उपयोग किया है और अंग्रेजी के पर्यायवाची शब्द भी दिए हैं। पुस्तक में प्रत्येक अध्याय के अंत में अभ्यास के प्रश्न दिए गए हैं, जिससे छात्रों को अध्ययन में मदद मिलेगी। लेखक का मानना है कि यदि यह पुस्तक सांख्यिकी को हिंदी में पढ़ने या पढ़ाने में सहायक साबित होती है, तो उनका प्रयास सफल होगा। पुस्तक के विभिन्न अध्यायों में सांख्यिकी के मूलभूत सिद्धांत, सांख्यिकी अनुसंधान का आयोजन, सामग्री संकलन, डेटा का संपादन, वर्गीकरण, सांख्यिकीय माध्य, अपकिरण और विषमता, सहसंबंध का सिद्धांत, और भारतीय सांख्यिकी जैसे विषय शामिल हैं। इस प्रकार, यह पाठ सांख्यिकी के अध्ययन में हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण स्रोत प्रदान करने का प्रयास करता है।


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