संगीतांजलि (प्रथम भाग) | Sangeetanjali (part1)

By: पं ओमकारनाथ ठाकुर - Pt. Omkarnath Thakur
संगीतांजलि  (प्रथम भाग) | Sangeetanjali (part1) by


दो शब्द :

यह पाठ "संगीतांजलि" नामक पुस्तक का परिचय और उसकी उद्देश्यों का वर्णन करता है। लेखक पं. ओमकारनाथ ठाकुर ने संगीत शिक्षा के लिए इस पुस्तक को लिखा है, जिसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को संगीत की शिक्षा सरलता और प्रभावी तरीके से प्रदान करना है। लेखक ने संगीत शिक्षा की पारंपरिक प्रणालियों पर विचार करते हुए, अपने अनुभव के आधार पर एक नई विधि का प्रस्ताव रखा है, जिससे विद्यार्थी आसानी से संगीत के विभिन्न रागों और गीतों को सीख सकें। पुस्तक में रागों की संरचना, उनके आरोह-अवरोह और ताल के विभिन्न प्रकारों का विवरण दिया गया है। भूपाली राग को प्राथमिकता दी गई है, क्योंकि यह शुरुआत के लिए आसान है। इसके बाद अन्य रागों का परिचय दिया गया है। लेखक ने अपने अनुभवों के माध्यम से यह स्पष्ट किया है कि कैसे विद्यार्थी बिना किसी पूर्व ज्ञान के भी संगीत सीख सकते हैं। इस पुस्तक के माध्यम से लेखक ने संगीत शिक्षा में नई दिशा देने का प्रयास किया है, ताकि विद्यार्थी कम प्रयास में अधिक ज्ञान और कौशल प्राप्त कर सकें। लेखक ने यह भी स्वीकार किया है कि उनकी पुस्तक में कुछ दोष हो सकते हैं, लेकिन उन्होंने गुणी जनों से उन दोषों की पहचान करने की अपील की है। इस तरह, "संगीतांजलि" एक संगीत शिक्षा के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों को संगीत के प्रति आकर्षित करना और उनकी क्षमताओं को विकसित करना है।


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