तुजुक-इ-जहांगीरी | Tuzk-e-Jahangiri

By: मथुरालाल शर्मा - Dr. Mathuralal Sharma
तुजुक-इ-जहांगीरी | Tuzk-e-Jahangiri by


दो शब्द :

इस पाठ में डॉ. मधुगलाल शर्मा द्वारा अनूदित "तुजुक-ए-जहाँगीरी" नामक आत्मकथा का सारांश प्रस्तुत किया गया है। यह आत्मकथा बादशाह जहाँगीर द्वारा लिखी गई है और इसमें उनके जीवन के महत्वपूर्ण घटनाक्रमों का वर्णन है। जहाँगीर ने अपने शासन काल के सत्रहवें वर्ष तक का वृतांत स्वयं लिखा, और इसके बाद की घटनाओं को उन्होंने मुदामिद खॉ को लिखवाया। यह आत्मकथा दो जिल्दों में विभाजित है और इसमें न केवल व्यक्तिगत अनुभव बल्कि राजनीतिक और ऐतिहासिक घटनाओं का भी उल्लेख किया गया है। जहाँगीर का जन्म एक दरवेश की कृपा से हुआ, जिसके बाद उन्हें "सुल्तान सलीम" नाम दिया गया। उनकी माता के प्रसव के समय उनके पिता ने विशेष प्रार्थना की थी। बाद में जहाँगीर ने अपने नाम को बदलकर "जहाँगीर" रखा, जिसका अर्थ है "जो संसार को जीतता है"। इसके साथ ही, उन्होंने अपनी उपाधि "नूरूद्दीन" रखी, जिसका अर्थ है "धर्म का प्रकाश"। पाठ में आगरा नगर का भी वर्णन किया गया है, जहां जहाँगीर का जन्म हुआ और जहाँ उनके पिता ने एक सुंदर किला बनवाया। यह किला और नगर भारतीय इतिहास में विशेष महत्व रखते हैं। जहाँगीर के शासन के दौरान विभिन्न राजनीतिक घटनाओं, जैसे कि खुसरो का पलायन, युद्ध, और विभिन्न उत्सवों का भी उल्लेख किया गया है। यह आत्मकथा न केवल जहाँगीर के व्यक्तिगत जीवन की कहानी है, बल्कि उस समय के इतिहास, संस्कृति और राजनीति की भी झलक प्रदान करती है। डॉ. मथुरालाल शर्मा ने इस अनुवाद में मूल सामग्री को संक्षेप में और स्पष्ट भाषा में प्रस्तुत किया है, जिससे पाठकों को जहाँगीर के जीवन और उनके शासनकाल की घटनाओं को समझने में मदद मिलती है।


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