आधुनिक शिक्षा मनोविज्ञान | Adhunik Shiksha Manovigyan

By: ईश्वरचन्द्र शर्मा - Ishwarchandra Sharma डॉ. पी. टी. राज - Dr. P. T. Raj


दो शब्द :

इस पाठ में आधुनिक शिक्षा-मनोविज्ञान पर चर्चा की गई है। लेखक ईश्वरचन्द्र शर्मा ने शिक्षा के क्षेत्र में मनोविज्ञान के महत्व को समझाने के लिए यह पुस्तक लिखी है। उन्होंने महसूस किया कि हिन्दी में शिक्षा-मनोविज्ञान पढ़ाने से छात्रों में अधिक रुचि उत्पन्न होती है। पुस्तक का उद्देश्य छात्रों और माता-पिता को शिक्षा के मनोवैज्ञानिक पहलुओं से अवगत कराना है, ताकि वे बच्चों के मानसिक विकास में सहायक बन सकें। लेखक ने बताया है कि शिक्षा का माध्यम अंग्रेज़ी होने के कारण छात्रों को अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। इसलिए उन्होंने हिन्दी में इस विषय पर पुस्तक लिखने का निर्णय लिया। यह पुस्तक न केवल इंटरमीडिएट स्तर के छात्रों के लिए, बल्कि बीए और सीटी पाठ्यक्रमों के लिए भी उपयुक्त है। इसमें सरल भाषा का प्रयोग किया गया है ताकि आम जनता भी इसे समझ सके। पुस्तक में विभिन्न अध्यायों के माध्यम से शिक्षा के विभिन्न मनोवैज्ञानिक पहलुओं, जैसे कि आदत, स्मृति, ज्ञान, अवधान, कल्पना, विचार और सीखने की प्रक्रियाओं पर चर्चा की गई है। लेखक का विश्वास है कि यदि माता-पिता अपने बच्चों को मनोवैज्ञानिक तरीके से शिक्षा दें, तो यह शिक्षा और भी प्रभावी होगी। लेखक ने इस पुस्तक के माध्यम से हिन्दी साहित्य में मनोविज्ञान के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान देने का प्रयास किया है। उन्होंने पुस्तक के विकास में कई विद्वानों और अपने परिवार के सदस्यों का सहयोग भी उल्लेख किया है। अंत में, लेखक ने इस विषय पर आगे बढ़ने के लिए सभी पाठकों को प्रेरित किया है ताकि वे शिक्षा-मनोविज्ञान की गहराई को समझ सकें और इसे अपने जीवन में लागू कर सकें।


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