रूपमती | Roopmati

By: गुलशन नंदा - Gulshan Nanda
रूपमती | Roopmati by


दो शब्द :

वर्षा ऋतु, भारत की ऋतुओं में सबसे अद्भुत मानी जाती है। इस मौसम में आसमान में घनघोर बादल छा जाते हैं और बारिश होती है। तालाब और नदियाँ भर जाती हैं, और प्रकृति हरी चादर ओढ़ लेती है। इस मौसम में हर जीव के मन में नई आशाएँ जागृत होती हैं। गाँव चाँदनगर में 'तीज' का त्योहार मनाया जा रहा था, जहाँ महिलाएँ अपने सौंदर्य और गहनों से सजी हुई थीं। एक गायिका, जिसका नाम रूपा था, अपने गाने से सबका ध्यान आकर्षित कर रही थी। उसका गाना सुनकर लोग मंत्रमुग्ध हो रहे थे। गाँव में सभी लोग खुश थे, पकवान बना रहे थे, और हँसी-मजाक कर रहे थे। एक बुजुर्ग व्यक्ति अपनी पत्नी से रूपा को घर से बाहर न जाने देने की बात कर रहा था। पत्नी ने कहा कि अन्य लड़कियाँ भी तो बाहर जाती हैं, लेकिन बुजुर्ग ने अपनी चिंता जताई। इसी बीच, रूपा की चाची वहाँ आईं, और उन्होंने रूपा से प्यार से बातें कीं। चाची का रूपा के प्रति प्रेम देखकर सब हँस पड़े। गाँव की संस्कृति में युवाओं पर कड़ी नजर रखी जाती थी, और सबकी कोशिश होती थी कि वे किसी भी प्रकार की समस्या से बचें। रूपा के युवावस्था की बहार देखकर गाँव वाले उसकी शादी के लिए अच्छे वर की तलाश करने लगे थे। एक दिन, चौधरी के बेटे ने रूपा पर अपनी नजरें गड़ाई, लेकिन रूपा ने उससे मिलने की हिम्मत नहीं की। इस प्रकार, कहानी में प्रेम, सामाजिक नियम और पारिवारिक जिम्मेदारियों का मिश्रण देखने को मिलता है। रूपा की सुंदरता और उसकी स्थिति को लेकर गाँव वालों की जिज्ञासा और चिंताएँ प्रमुखता से दर्शाई गई हैं। यह कथा हमें यह भी बताती है कि किस तरह युवाओं की इच्छाएँ और आकांक्षाएँ हमेशा से विद्यमान रही हैं, चाहे समय और समाज कैसे भी हों।


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