बदनाम | Badnam

- श्रेणी: उपन्यास / Upnyas-Novel कहानियाँ / Stories
- लेखक: गुलशन नंदा - Gulshan Nanda
- पृष्ठ : 204
- साइज: 22 MB
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दो शब्द :
यह पाठ गुलशन नन्दा के उपन्यास की भूमिका और एक दृश्य का विवरण प्रस्तुत करता है। लेखक ने अपने पाठकों के प्रति आभार व्यक्त किया है और अपने नए उपन्यास के बारे में बताया है, जिसे उन्होंने पाठकों की भावनाओं और विचारों को ध्यान में रखकर लिखा है। पाठ का एक हिस्सा एक पिता और उसके एक साल के बेटे विजय के बीच की बातचीत और उनके पलंग पर बैठने के क्षण को दर्शाता है। पिता विजय को खेलते हुए देखकर उसकी मासूमियत का आनंद लेता है। पिता का वात्सल्य और बेटे के प्रति उसकी स्नेह भावना इस दृश्य को और भी भावुक बनाती है। इसके बाद, पिता अपनी पत्नी के साथ बातचीत करता है, जिसमें वे एक पत्थर की मूर्ति की सुंदरता की चर्चा करते हैं। पत्नी उस मूर्ति की कारीगरी की तारीफ करती है और पति उसे समझाता है कि इस कला में समय और मेहनत लगती है। वे यह भी चर्चा करते हैं कि कैसे समाज में कारीगरों की कड़ी मेहनत को कमतर आंका जाता है और यह कि कला और कारीगरी की कद्र नहीं होती है। इसमें यह भी दर्शाया गया है कि गरीबी और आर्थिक संघर्ष के कारण लोग कला और कारीगरी से दूर होते जा रहे हैं। अंत में, पत्नी एक वृद्धा की मूर्ति का उल्लेख करती है, जो बहुत सुंदर है, लेकिन वह उसे बेचने को तैयार नहीं है, भले ही उसे बहुत अधिक कीमत की पेशकश की जाए। कुल मिलाकर, यह पाठ रिश्तों, स्नेह, कला, और समाज में कारीगरों की स्थिति पर एक गहरी सोच और संवेदनशीलता को दर्शाता है।
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