जाति विच्छेद | Jati vichhed

- श्रेणी: Cultural Studies | सभ्यता और संस्कृति जातिप्रथा / Caste System भारत / India
- लेखक: डॉ भीमराओ रामजी अम्बेडकर - Dr. Bhimrao Ramji Ambedkar
- पृष्ठ : 186
- साइज: 3 MB
- वर्ष: 1852
-
-
Share Now:
दो शब्द :
इस पाठ का सारांश जाति और जाति-विभाजन के मुद्दों पर केंद्रित है, जिसमें डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों का प्रचार करने का प्रयास किया गया है। पाठ में जाति व्यवस्था के खिलाफ विचारों और इसके सामाजिक, आर्थिक, और राजनीतिक प्रभावों पर चर्चा की गई है। इस पुस्तक का उद्देश्य जाति-भेद को समाप्त करना और समाज में समानता लाना है। डॉ. अंबेडकर ने जाति और वर्ण व्यवस्था की आलोचना करते हुए इसे भारतीय समाज की बड़ी समस्या बताया है। उन्होंने जाति-भेद के मूल कारणों और इसके सुधार के लिए जरूरी उपायों का उल्लेख किया है। पुस्तक में डॉ. अंबेडकर के विचारों का महत्व बताते हुए अन्य सामाजिक नेताओं के विचारों की भी समीक्षा की गई है। इसके अलावा, पाठ में यह भी बताया गया है कि जाति-भेद मिटाने के लिए किस प्रकार की सामाजिक और धार्मिक सोच में परिवर्तन की आवश्यकता है। सारांश में यह स्पष्ट है कि जाति और वर्ण व्यवस्था की आलोचना करते हुए, डॉ. अंबेडकर ने एक ऐसे समाज की कल्पना की है जहां समानता और न्याय का शासन हो। उन्होंने जाति-भेद को समाप्त करने के लिए एक मजबूत सामाजिक आंदोलन की आवश्यकता पर जोर दिया है और इसके लिए सभी वर्गों के लोगों को एकजुट होने का आह्वान किया है।
Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.