एक जीनियस की प्रेमकथा | Ek Genius Ki Premkatha

- श्रेणी: जीवनी / Biography भारत / India साहित्य / Literature
- लेखक: भैरव प्रसाद गुप्त - bhairav prasad gupt
- पृष्ठ : 140
- साइज: 2 MB
- वर्ष: 1960
-
-
Share Now:
दो शब्द :
यह कहानी एक जीनियस राजेश और उसकी पत्नी कुसुम के बीच की प्रेमकथा को दर्शाती है। कहानी के आरंभ में राजेश एक मानसिक उथल-पुथल से गुजर रहा है, जब कुसुम ने उसे एक ऐसी बात कह दी, जिससे वह तड़प उठा है। कुसुम, जो राजेश के पीछे-पीछे आई है, उससे स्पष्ट जवाब मांगती है कि क्या वह उसकी पत्नी है या किसी और की। राजेश इस समय मानसिक तनाव में है और उसे अकेले रहने की आवश्यकता है, लेकिन कुसुम उसे शांति से बात करने का मौका नहीं देती। राजेश का मन उन बातों की वजह से टूट गया है, जो कुसुम ने कही हैं, और वह खुद को बहुत कमजोर महसूस कर रहा है। कुसुम उसकी भावनाओं का मजाक उड़ाती है और उसे चुनौती देती है। राजेश अंततः अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की कोशिश करता है, लेकिन कुसुम की कठोरता और सवालों के आगे वह बेबस नज़र आता है। कुसुम राजेश से यह जानना चाहती है कि उसकी स्थिति क्या है और वह अपने पति के प्रति उसके प्यार और विश्वास की पुष्टि चाहती है। राजेश की मानसिक स्थिति इतनी खराब है कि वह बार-बार अपने सिर को चोट देने की बात करता है। कुसुम उसे लगातार चिढ़ाती है, लेकिन अंत में वह थोड़ी नरम पड़ती है और राजेश को एक रात और मौका देती है। कहानी में भावनाओं का जटिल ताना-बाना है, जिसमें प्यार, विश्वास, और असुरक्षा के तत्व शामिल हैं। राजेश और कुसुम के बीच की बातचीत से उनकी मानसिक और भावनात्मक स्थिति स्पष्ट होती है। यह एक गहन प्रेम कहानी है, जिसमें दोनों पात्रों की जटिलता और संघर्ष को बखूबी दर्शाया गया है।
Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.