राजस्थानी हिंदी कहावत कोश | Rajasthani Hindi Kahawat Kosh

By: विजयदान देथा - Vijaydan Detha
राजस्थानी  हिंदी कहावत कोश  | Rajasthani Hindi Kahawat Kosh by


दो शब्द :

यह पाठ राजस्थानी-हिंदी कहावतों की एक संकलन का हिस्सा है, जिसमें विभिन्न कहावतों के अर्थ और उनके संदर्भों के साथ व्याख्या की गई है। इसमें कुल पंद्रह हजार कहावतें और तीन सौ तैंतीस संदर्भ कथाएँ शामिल हैं। कहावतें सामाजिक जीवन, नैतिकता, मानव व्यवहार, और पारिवारिक संबंधों पर प्रकाश डालती हैं। कहावतों से यह स्पष्ट होता है कि कैसे लोग अपने अनुभवों के आधार पर जीवन की सच्चाइयों को संक्षेप में व्यक्त करते हैं। जैसे, 'लाठी जिणण भ्रैंस' का अर्थ है कि सख्ती के बिना प्रशासन संभव नहीं है, और 'लाड़ी ने पाड़ी नीवड़ियां बखांण' का मतलब है कि स्त्री और पाड़ी की सराहना तब की जानी चाहिए जब वे उपयोगी साबित हों। इन कहावतों में पारिवारिक और सामाजिक संबंधों की जटिलताएँ भी दिखती हैं। उदाहरण के लिए, 'लाडले बेटे अधिक सिर चढ़ते हैं' यह दर्शाता है कि चहेते बेटे अक्सर अधिक बिगड़ जाते हैं, जबकि 'लाडका टाबर घणा इतरे' कहता है कि अनुशासन की कमी कर्मचारी को उच्छृंखल बना देती है। कुल मिलाकर, यह संग्रह राजस्थानी संस्कृति और समाज के विभिन्न पहलुओं को उजागर करता है, जिसमें मानवीय संबंधों, नैतिकता और जीवन के अनुभवों का समावेश है।


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