यूरोप का इतिहास | Europe Ka Itihas

By: लाल बहादुर वर्मा - Lal Bahadur Varma
यूरोप का इतिहास | Europe Ka Itihas by


दो शब्द :

इस पाठ में यूरोप के इतिहास, विशेषकर पंद्रहवीं शताब्दी के बाद के घटनाक्रमों का संक्षेप में विवेचन किया गया है। लेखक डॉ. लालबहादुर वर्मा ने इतिहास के अध्ययन की प्रासंगिकता और उपयोगिता पर विचार किया है। वे बताते हैं कि इतिहास को समझने के लिए केवल नाम और तिथियों का ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि घटनाओं के पीछे के अर्थ और उनके महत्व को समझना आवश्यक है। पुनर्जागरण को आधुनिकता का आरंभ मानते हुए लेखक ने कहा है कि यह मानवता के जागरण का एक महत्वपूर्ण चरण था। यूरोप के इतिहास को समझने के लिए जरूरी है कि हम मध्ययुगीन अंधकार से पुनर्जागरण तक की यात्रा को देखें। मध्यकाल में चर्च की शक्ति और उसके राजनीतिक प्रभाव का वर्णन करते हुए लेखक ने बताया कि कैसे चर्च ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता को सीमित किया और समाज पर नियंत्रण रखा। लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि विभिन्न कालों में विभिन्न देशों और वर्गों की सामाजिक-आर्थिक स्थितियाँ भिन्न थीं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि इतिहास को एक निश्चित श्रेणी में बाँटना कठिन है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यूरोप का अध्ययन करते समय सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि विभिन्न देशों और वर्गों के विकास के स्तर में भिन्नता होती है। इस प्रकार, पाठ में यूरोप के इतिहास के विभिन्न पहलुओं, पुनर्जागरण के प्रभाव और चर्च की भूमिका के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रस्तुत की गई है, जो इतिहास के विद्यार्थियों और पाठकों के लिए उपयोगी है।


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