मानस-पियूष प्रथम सोपान (बालकाण्ड) | Manas-Piyush Pratham Sopan (Balkand)

By: महात्मा श्री अंजनीनन्दन शरणजी - Mahatma Sri Anjaninandan Sharanji


दो शब्द :

इस पाठ में श्रीरामचरितमानस के बालकांड का एक महत्वपूर्ण हिस्सा प्रस्तुत किया गया है, जिसमें उमा और शिवजी के बीच संवाद है। इसमें उमा, जो पार्वती के रूप में जानी जाती हैं, शिवजी से पूछती हैं कि सगुण ब्रह्म कैसे निगुण ब्रह्म के रूप में अवतार लेता है। उनका प्रश्न यह है कि क्या ब्रह्म, जो निराकार और निरुपद्रव है, वह सगुण रूप में क्यों आता है? शिवजी के उत्तर में यह बताया गया है कि निगुण ब्रह्म ही सगुण रूप धारण कर सकता है और इसी प्रकार से राम का अवतार भी हुआ है। इस संवाद में, उमा की शंकाओं का समाधान किया जाता है और यह स्पष्ट किया जाता है कि राम का बालचरित (बचपन की लीलाएं) उदार और सरल है, जिसमें भक्तों को आनंद और ज्ञान की प्राप्ति होती है। यह खंड राम के अवतार की प्रक्रिया को भी स्पष्ट करता है और दर्शाता है कि राम का चरित्र केवल सगुण रूप में नहीं, बल्कि एक दिव्य और उच्चतर सत्य के रूप में भी महत्वपूर्ण है। पाठ में विभिन्न संतों और विचारकों के उद्धरणों सहित, रामायण की टीकाओं और उनके अर्थ का भी उल्लेख किया गया है। इसे पढ़कर यह समझ में आता है कि राम का चरित्र और उनका अवतार न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह आत्मा के सच्चे स्वरूप की पहचान का भी मार्गदर्शन करता है।


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