दुर्लभ शाबर मंत्रो का रहस्य | Durlabh Shabar Mantro ka Rahasya

By: अज्ञात - Unknown
दुर्लभ शाबर मंत्रो का रहस्य  | Durlabh Shabar Mantro ka Rahasya by


दो शब्द :

यह पाठ भगवान शिव द्वारा किए गए और गुरु द्वारा सिद्ध किए गए मंत्रों के महत्व और उपयोग पर केंद्रित है। इसमें बताया गया है कि चिकित्सा के तीन प्रकार होते हैं: आसुरी चिकित्सा, मानुषी चिकित्सा, और दैवीय चिकित्सा। आसुरी चिकित्सा में शल्य चिकित्सा होती है, मानुषी चिकित्सा औषधियों द्वारा होती है, जबकि दैवीय चिकित्सा में मंत्रों का उपयोग किया जाता है। पाठ में यह भी कहा गया है कि कुछ रोग ऐसे होते हैं जिन्हें औषधियों से ठीक नहीं किया जा सकता, और ऐसे में मंत्रों का सहारा लिया जाता है। शाबर मंत्रों का उल्लेख किया गया है, जो अत्यधिक प्रभावशाली होते हैं और जिनका प्रयोग करके कई प्रकार के रोगों का उपचार संभव है। पाठ में विभिन्न मंत्रों का संग्रह दिया गया है, जिन्हें विभिन्न रोगों के उपचार के लिए जपने और उपयोग करने की विधि बताई गई है। जैसे कि मोच, बवासीर, पाचन में कठिनाई आदि के लिए विशेष मंत्र दिए गए हैं, जिनका उपयोग कर रोगी को राहत दी जा सकती है। इन मंत्रों को सिद्ध करने के लिए निश्चित संख्या में जप करना आवश्यक है, और फिर इनका प्रयोग रोगी पर झाड़ा लगाने या अभिषेक करने के लिए किया जाता है। यह भी बताया गया है कि इन मंत्रों के जप से रोगों का प्रभावी उपचार किया जा सकता है और शरीर को रोगमुक्त किया जा सकता है। पाठ में मंत्रों की प्रभावशीलता और उनके चमत्कारिक परिणामों का उल्लेख किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि ये मंत्र चिकित्सा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।


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