उदयपुर राज्य का इतिहास पार्ट-१ | Udaipur Rajya Ka Itihas Part-1

- श्रेणी: इतिहास / History भारत / India
- लेखक: महामहोपाध्याय राय बहादुर पंडित गौरीशंकर हीराचन्द्र ओझा - Mahamahopadhyaya Rai Bahadur Pandit Gaurishankar Hirachand Ojha
- पृष्ठ : 511
- साइज: 26 MB
- वर्ष: 1928
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दो शब्द :
यह पाठ मेवाड़ के इतिहास और विशेष रूप से उदयपुर राज्य के प्रति समर्पित है। इसमें गौरीशंकर हीराचंद ओझा द्वारा लिखित "उदयपुर राज्य का इतिहास" का महत्व बताया गया है। ओझा जी ने मेवाड़ के इतिहास को गहराई से अध्ययन किया है और उनके ग्रंथ में मेवाड़ी शौर्य और बलिदानों की गाथा को प्रमुखता से दर्शाया गया है। लेखक ने मेवाड़ के स्वतंत्रता प्रेम, यहाँ के वीरों के बलिदान और महाराणा भगवतसिंह जी के प्रयासों की प्रशंसा की है, जिन्होंने मेवाड़ की मान-मर्यादा को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ओझा जी का ग्रंथ एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्रोत है जो न केवल शोधकर्ताओं बल्कि सामान्य पाठकों के लिए भी रुचिकर है। इतिहास के महत्व को बताते हुए लेखक ने इसे मानव समाज की उन्नति का एक साधन बताया है, जिससे हमें अपने अतीत के गौरव और कर्तव्यों का ज्ञान होता है। मेवाड़ का इतिहास, विशेष रूप से उदयपुर का, स्वतंत्रता और संघर्ष की कहानियों से भरा हुआ है, जो इसे अन्य राजपूत राज्यों की तुलना में विशिष्ट बनाता है। पाठ में यह भी उल्लेख किया गया है कि उदयपुर का राजवंश प्राचीन और गौरवमयी है, जिसने कई बार मुगलों और अन्य आक्रमणकारियों का सामना किया। अंत में, मेवाड़ के इतिहास को चार भागों में विभक्त किया गया है, जिससे उसकी समृद्धि और स्वतंत्रता की कहानी स्पष्ट होती है। यह पाठ मेवाड़ के इतिहास के प्रति श्रद्धा और गर्व की भावना को उजागर करता है।
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