गोरक्ष पद्धति | Gorakh Paddhati

By: महीधर शर्मा - Mahadhir Sharma


दो शब्द :

इस पाठ का सारांश इस प्रकार है: गंगाविष्णु श्रीकृष्णदास द्वारा रचित "गोरक्षपद्धति" एक महत्वपूर्ण योगग्रंथ है, जिसमें योग, ध्यान, और साधना के विभिन्न पहलुओं का वर्णन किया गया है। इसमें विशेष रूप से गोरक्षनाथ और उनके शिष्यगणों के माध्यम से योग की सिद्धियों और ध्यान की प्रक्रिया को विस्तार से बताया गया है। इस ग्रंथ में योगाभ्यास की विधियाँ, प्राणायाम, आसन, और ध्यान की तकनीकें शामिल हैं। पाठ में विभिन्न योगिक क्रियाओं का उल्लेख है, जैसे कि भस्त्रिका, कुम्भक, और अन्य प्राणायाम विधियाँ, जो साधक को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य प्रदान करती हैं। इसके अलावा, यह ग्रंथ ध्यान की विभिन्न अवस्थाओं को भी स्पष्ट करता है, जैसे कि धारणा, ध्यान, और समाधि। साधक को अपने मन और इंद्रियों को नियंत्रित करने के लिए विशेष ध्यान देना होता है, जिससे वह आत्मज्ञान और मोक्ष की प्राप्ति कर सके। इस प्रकार, "गोरक्षपद्धति" योग के गूढ़ रहस्यों और साधना की विधियों को सरल और स्पष्ट रूप से प्रस्तुत करता है, जिससे साधक अपने आध्यात्मिक विकास के पथ पर आगे बढ़ सके।


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