श्री भगवत सुधा-सागर | Shri Bhagwat Sudha-Sagar

- श्रेणी: धार्मिक / Religious भक्ति/ bhakti हिंदू - Hinduism
- लेखक: हनुमान प्रसाद पोद्दार - Hanuman Prasad Poddar
- पृष्ठ : 1061
- साइज: 92 MB
- वर्ष: 1951
-
-
Share Now:
दो शब्द :
यह पाठ श्रीमद्भागवत का महत्व और इसकी व्याख्या का विवरण प्रस्तुत करता है। पाठ में यह बताया गया है कि श्रीमद्भागवत भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथ है, जिसे वैष्णव सम्प्रदाय में विशेष सम्मान दिया जाता है। इसे वेदों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है और इसके प्रति आचार्यों का विशेष आदर है। पाठ में यह भी वर्णित है कि कई आचार्यों ने इसे उपनिषदों के साथ तीसरा प्रस्थान माना है। श्रीमद्भागवत को भगवान श्रीकृष्ण का प्रत्यक्ष स्वरूप माना गया है और इसके अध्ययन से भक्ति, ज्ञान और वैराग्य की प्राप्ति होती है। इस ग्रंथ का संपूर्ण उद्देश्य प्रेम और भक्ति का प्रचार करना है, जिससे भक्तों को आनंद और शांति मिल सके। पाठ में नारदजी का एक प्रसंग भी है, जिसमें वे यज्ञ करने की इच्छा व्यक्त करते हैं और आकाशवाणी का उल्लेख करते हैं, जो उन्हें एक विशेष साधन की ओर इंगित करती है। नारदजी विभिन्न ऋषियों से मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए जाते हैं, लेकिन उन्हें कोई निश्चित उत्तर नहीं मिलता। अंततः उन्हें तप करने का निश्चय होता है और वे संतों से मार्गदर्शन की प्रार्थना करते हैं। संत उन्हें बताते हैं कि श्रीमद्भागवत का पाठ और सुनना ही भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का उत्तम साधन है। इस प्रकार, पाठ का सार यह है कि श्रीमद्भागवत एक अद्वितीय ग्रंथ है, जो भक्तों को सच्चे प्रेम और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है और इसके अध्ययन से जीवन में आनंद और शांति की प्राप्ति होती है।
Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.