तीज सर्वोदये विज्ञानं | Teej Sarvodaye Vigyanam

By: रामेश्वरलाल शर्मा - Rameshwarlal Sharma
तीज सर्वोदये विज्ञानं | Teej Sarvodaye Vigyanam by


दो शब्द :

"तेज स्वरोग विज्ञान" पुस्तक में लेखक पं. रमेश्वरलाल शर्मा ने प्राचीन भारतीय विज्ञान और आध्यात्मिकता के पहलुओं को उजागर किया है। पुस्तक का मूल विषय स्वर और उसकी वैज्ञानिकता है, जिसमें भौतिक और आध्यात्मिक ज्ञान का समन्वय किया गया है। लेखक ने बताया है कि आधुनिक विज्ञान केवल भौतिक चीजों के विश्लेषण तक सीमित रह गया है, जबकि प्राचीन भारतीय विज्ञान में भौतिक और आध्यात्मिक दोनों का समावेश था। पुस्तक में स्वर के विभिन्न पहलुओं, जैसे श्वास और उसके प्रभाव, प्राण वायु, और नाड़ी विज्ञान पर चर्चा की गई है। लेखक ने यह भी बताया कि कैसे साधक और सामान्य व्यक्ति इस विज्ञान से लाभ उठा सकते हैं और अपने जीवन में सुधार कर सकते हैं। इसके अलावा, लेखक ने ध्यान और योग की प्राचीन पद्धतियों को समझाने का प्रयास किया है, जिससे पाठक को आत्मा की गहराईयों तक पहुँचने में मदद मिल सके। लेखक ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह विज्ञान केवल साधकों के लिए नहीं है, बल्कि हर व्यक्ति, चाहे वह किसी भी वर्ग या स्थिति में हो, इसे समझकर अपने जीवन में उतार सकता है। इस पुस्तक के माध्यम से लेखक ने पाठकों को अपने अंदर की शक्ति को पहचानने और जागरूक होने के लिए प्रेरित किया है। अंत में, यह पुस्तक वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भारतीय संस्कृति और परंपरा के ज्ञान को पुनर्जीवित करने का प्रयास करती है।


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