आनन्द मठ | Anand Math

- श्रेणी: धार्मिक / Religious भारत / India साहित्य / Literature
- लेखक: छविनाथ पाण्डेय - Chhavi Nath Pandey पंडित ईश्वरी प्रसाद शर्मा - Pt. Ishvari Prasad Sharma बंकिमचंद्र चटर्जी - Bankimchandra Chatterjee
- पृष्ठ : 210
- साइज: 37 MB
- वर्ष: 1982
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दो शब्द :
"आनंद मठ" एक महत्वपूर्ण काव्यात्मक उपन्यास है जो स्वर्गीय बाबू वहि्लिमिचंद्र चटर्जी द्वारा लिखा गया है। यह उपन्यास विशेष रूप से बंगाल के इतिहास और संस्कृति से जुड़ा हुआ है। लेखक ने अपने लेखन में बंगाल के लोगों के अनुभवों और समस्याओं को गहराई से प्रस्तुत किया है। इस उपन्यास में बंगाल के दो टुकड़े होने के बाद "वंदेमातरम्" गीत की महत्ता को दर्शाया गया है, जो भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का प्रतीक बन गया। "आनंद मठ" में इस गीत को पहले बार शामिल किया गया था, जिससे इसे व्यापक पहचान मिली। उपन्यास में भारत की मातृभूमि के प्रति भक्ति और प्रेम को महत्वपूर्ण रूप से दर्शाया गया है। लेखक ने इस उपन्यास के अनुवाद का कार्य सरल और सुबोध भाषा में किया है, ताकि पाठक आसानी से समझ सकें। इसके साथ ही उन्होंने मूल पाठ का रस बनाए रखने का प्रयास किया है। कहानी एक घने जंगल में सेट होती है, जहाँ अंधकार और निस्तब्धता का माहौल है। पात्रों के बीच संवाद के माध्यम से उनके मन की इच्छाओं और संघर्षों को उजागर किया गया है। उपन्यास के आरंभ में बंगाल के एक गाँव की स्थिति का चित्रण है, जहाँ सूखा और अकाल के कारण लोग दुखी हैं। कहानी में महेंद्र और उसकी पत्नी कल्याणी के माध्यम से समाज के कठिनाइयों और मानवीय संबंधों को दर्शाया गया है। उनका संघर्ष, परिवार की रक्षा और जीविका के लिए उनकी इच्छाएँ इस उपन्यास का मुख्य केंद्र हैं। कुल मिलाकर, "आनंद मठ" एक गहन सामाजिक और राजनीतिक संदर्भ में लिखा गया उपन्यास है, जो न केवल साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि भारतीय संस्कृति और स्वतंत्रता संग्राम की भावना को भी उजागर करता है।
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