बृहत विश्वा सूक्ति कोष वॉल-१ | Brihat Vishwa Sukti Kosh Vol-1

- श्रेणी: दार्शनिक, तत्त्वज्ञान और नीति | Philosophy भारत / India साहित्य / Literature
- लेखक: डॉ. श्याम बहादुर वर्मा - Dr. Shyam Bahadur Verma मधु वर्मा - Madhu Varma
- पृष्ठ : 537
- साइज: 22 MB
- वर्ष: 1954
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दो शब्द :
इस पाठ में साहित्य और सूक्तियों के महत्व को दर्शाया गया है। लेखक ने बताया है कि उत्तम पुस्तकें संस्कृति का सर्वोत्तम उपहार हैं और ये मानवता की बुद्धि और मन की ऊँचाइयों का परिचय देती हैं। साहित्य में शामिल विभिन्न प्रकार के ग्रंथ, जैसे धर्मग्रंथ, नीतिग्रंथ, उपन्यास, कविताएँ, इतिहास आदि, मानव जीवन को प्रकाश और प्रेरणा देने में सक्षम होते हैं। सूक्तियाँ, जो विचारों को संक्षेप में व्यक्त करती हैं, अमृत-बिन्दुओं के समान होती हैं और इनमें जीवन-दृष्टियों का गहरा प्रभाव होता है। सूक्तिकोश का उद्देश्य विभिन्न विषयों पर अत्यंत प्रभावी उद्धरणों का संग्रह करना है, जिससे पाठक उन्हें सही संदर्भ में उपयोग कर सकें। यह न केवल याददाश्त में सहायक होते हैं, बल्कि लेखक, वक्ता और समाज के विभिन्न वर्गों के लिए भी उपयोगी होते हैं। सूक्तियाँ साहित्य में महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं और ये मनोविज्ञान के माध्यम से विचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में मदद करती हैं। भारत में संस्कृत साहित्य की प्राचीन परंपरा के अंतर्गत सुभाषित-संग्रहों का उल्लेख किया गया है, जो ज्ञान और अनुभव का भंडार हैं। संस्कृत के सूक्तिसंग्रह न केवल भारतीय साहित्य को समृद्ध करते हैं, बल्कि विश्व साहित्य में भी एक विशेष स्थान रखते हैं। प्राकृत और अपभ्रंश साहित्य में भी सूक्तियों के संग्रह की परंपरा रही है, जो भारतीय संस्कृति और साहित्य को समृद्ध बनाने में सहायक रही है। इस प्रकार, सूक्तियाँ और सूक्तिकोश न केवल ज्ञान के भंडार हैं, बल्कि वे मानवता के लिए प्रेरणा और मार्गदर्शन का स्रोत भी हैं।
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