बुद्धा - वाणी | Buddha-Vani

- श्रेणी: धार्मिक / Religious बौद्ध / Buddhism
- लेखक: वियोगी हरि - Viyogi Hari
- पृष्ठ : 160
- साइज: 3 MB
- वर्ष: 1935
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दो शब्द :
इस पाठ में आचार्य काका कालेलकर के विचारों के माध्यम से बौद्ध धर्म और उसकी शिक्षाओं की प्रासंगिकता पर चर्चा की गई है। उन्होंने धर्म के अध्ययन और विश्लेषण की आवश्यकता पर जोर दिया है, यह बताते हुए कि आज के युग में धर्म को बुद्धिमत्ता और विवेक की दृष्टि से समझना आवश्यक है। बौद्ध धर्म की शिक्षाएँ, जैसे अहिंसा, करुणा, और समभाव, मानवता के कल्याण के लिए महत्वपूर्ण हैं। पाठ में बौद्ध धर्म के मूल सिद्धांतों, जैसे आर्यसत्य-चतुष्टय और अष्टागिक मार्ग, की व्याख्या की गई है। ये सिद्धांत जीवन की वास्तविकताओं और दुखों से संबंधित हैं, और यह बताते हैं कि कैसे तृष्णा और अज्ञानता मानव दुख का कारण बनते हैं। बौद्ध धर्म की शिक्षा का उद्देश्य व्यक्ति को मानसिक शांति और आत्मज्ञान की ओर ले जाना है। इसके अलावा, लेखक ने बौद्ध साहित्य के हिंदी में अनुवाद की आवश्यकता पर भी बल दिया है, यह बताते हुए कि भारतीय भाषाओं में बौद्ध साहित्य का अभाव है। उन्होंने राहुल सांकृत्यायन और धर्मानंद कौशाबी जैसे विद्वानों के योगदान का उल्लेख करते हुए हिंदी में बौद्ध साहित्य के विकास की संभावनाओं पर प्रकाश डाला है। लेखक ने अपनी पुस्तक 'बुद्ध-वाणी' के माध्यम से बौद्ध धर्म की शिक्षाओं को सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें। उनका मानना है कि बौद्ध धर्म की शिक्षाएँ आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं और इन्हें समझना और अपनाना मानवता के लिए आवश्यक है।
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