क़ुरान पारा- ५ | Quraan para - 5

By: अज्ञात - Unknown
क़ुरान पारा- ५  | Quraan para - 5 by


दो शब्द :

इस पाठ में विवाह, पारिवारिक संबंधों, और सामाजिक नैतिकता से संबंधित कई महत्वपूर्ण आदेश दिए गए हैं। पहले भाग में यह बताया गया है कि कौन-सी औरतें वैवाहिक संबंधों के लिए हराम हैं, जैसे कि जंगी कैदी की औरतें, सिवाय इसके कि वे तुम्हारी मिल्कियत में आ जाएं। इस्लाम में यह भी बताया गया है कि वैवाहिक संबंध स्थापित करने का उद्देश्य शुद्धता और संयम होना चाहिए, न कि केवल इच्छाओं की पूर्ति। इसके बाद, उन व्यक्तियों के लिए जो आज़ाद मुसलमान औरतों से विवाह करने में असमर्थ हैं, कनीजों से विवाह करने की अनुमति दी गई है। विवाह के लिए उचित महर अदा करना अनिवार्य है और यह कहा गया है कि यदि कनीजें निकाह के बाद भी गलत कार्य में लिप्त होती हैं, तो उनके लिए दंड की आधी सजा होगी। पाठ में अल्लाह की दया और रहमत का भी उल्लेख है, साथ ही यह भी बताया गया है कि अल्लाह ने इंसान पर बोझ हल्का करने की इच्छा रखी है। ईमान वालों को एक-दूसरे का धन नाजायज़ तरीके से नहीं खाना चाहिए और न ही अपनी जान को खतरे में डालना चाहिए। जो लोग जुल्म करते हैं, उन्हें दोज़ख में डाला जाएगा। अल्लाह की इबादत करने और उसके साथ किसी को साझी न ठहराने का आदेश दिया गया है। रिश्तेदारों, यतीमों, मोहताजों और पड़ोसियों के साथ भलाई करने के लिए भी कहा गया है। इसके अलावा, यहूदियों और नास्तिकों की निंदा की गई है जो कि अल्लाह की शिक्षाओं का पालन नहीं करते हैं और बुराई करते हैं। अंत में, यह बताया गया है कि जो लोग अल्लाह के प्रति ईमान नहीं रखते हैं, वे दोज़ख के योग्य हैं, और जो लोग अपने कर्मों में सच्चे होते हैं, उन्हें अल्लाह की रहमत मिलेगी। पाठ में सामाजिक न्याय, पारिवारिक जिम्मेदारियों, और ईमानदारी का महत्व स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है।


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