प्राचीन भारत का राजनैतिक इतिहास | Prachin Bharat Ka Rajnitik Itihas

By: हेमचन्द्र राय चौधरी - Hemchandra Rai Chaudhary


दो शब्द :

इस ग्रंथ का उद्देश्य परीक्षित के राज्यारोहण से लेकर गुप्त-वंश के अंत तक के प्राचीन भारत के राजनीतिक इतिहास को प्रस्तुत करना है। लेखक ने देखा है कि समकालीन इतिहासकारों ने भारत के युद्ध से लेकर बौद्ध धर्म के विकास के काल के ऐतिहासिक तथ्यों को ठीक से संगठित नहीं किया है। इसलिए, उन्होंने इस कार्य को करने का निर्णय लिया और प्राचीन भारत के कालानुक्रमिक इतिहास को प्रस्तुत किया। लेखक ने इस इतिहास में भरतोत्तर काल को शामिल किया है, जबकि कन्नौज राज्य के पूरे काल को छोड़ दिया है। ग्रंथ दो भागों में विभाजित है। पहले भाग में वैदिक, महाकाव्य, पौराणिक, जैन, बौद्ध और ब्राह्मण साहित्य के अध्ययन के आधार पर परीक्षितोत्तर-पूर्व बिम्बिसार-युग के राजनीतिक उतार-चढ़ाव का विवरण दिया गया है। दूसरे भाग में बिम्बिसार से लेकर गुप्त सम्राटों तक के काल का इतिहास है। लेखक ने यह स्पष्ट किया है कि उनकी कृति भारत के सभी राज्यों के राजनीतिक और वंशानुगत इतिहास का विस्तृत विवरण नहीं है, बल्कि मुख्य रूप से उन साम्राज्यों पर ध्यान केंद्रित किया गया है जिनका देश की राजनीतिक घटनाओं पर प्रभाव पड़ा। उन्होंने यह भी स्वीकार किया है कि पहले के राजवंशों से संबंधित उपलब्ध सामग्री उतनी विश्वसनीय नहीं हो सकती। इस ग्रंथ में लेखक ने विभिन्न राजवंशों से संबंधित प्रश्नों पर विचार किया है और नई सामग्री को शामिल किया है। उन्होंने अपने अध्ययन में शिलालेखों का भी उपयोग किया है। लेखक ने यह भी बताया है कि कुछ ऐतिहासिक तथ्यों की निश्चितता नहीं हो पाई है। अंत में, लेखक ने यह स्वीकार किया है कि प्राचीन भारत के आरंभिक इतिहास में कई बिंदुओं पर अंधकार का एक गहरा पर्दा है, जिसे हटाना आसान नहीं है। इस पुस्तक का उद्देश्य इस अंधकार को दूर करने का प्रयास करना है और इसे विद्यार्थियों के लिए उपयोगी बनाना है।


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