प्राणायाम विज्ञानं और कला | Pranayama Vigyan Aur Kala

- श्रेणी: Health and Wellness | स्वास्थ्य योग / Yoga
- लेखक: पीतांबरदत्त बड़थ्वाल - Pitambardutt Barthwal
- पृष्ठ : 163
- साइज: 15 MB
- वर्ष: 1930
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दो शब्द :
यह पाठ डा. शाजावुरों आटेब की पुस्तक "दि साइंस एंड आट ऑफ डीप ब्रीदिंग" का हिंदी अनुवाद है। इस पुस्तक का उद्देश्य प्राणायाम को एक प्रभावी चिकित्सीय और स्वास्थ्यवर्धक साधन के रूप में प्रस्तुत करना है। अनुवादक, पोतांबरदत्त बड़ण्वाल, ने बताया है कि डा. आटेब ने 22 वर्ष की आयु में यक्ष्मा के खिलाफ प्राणायाम पर एक पुस्तक जापानी में लिखी थी, जिसे उन्होंने बाद में लंदन में अपनी चिकित्सा के दौरान विकसित किया। प्राणायाम का अभ्यास प्राचीन भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और इसे योग का एक मुख्य अंग माना जाता है। प्राणायाम के माध्यम से नाड़ियों की सफाई, शरीर की हल्कापन और मानसिक शांति प्राप्त की जा सकती है। पुस्तक में प्राणायाम के विभिन्न चरणों और विधियों का वर्णन किया गया है, जिसमें साँस को खींचने, रोकने और छोड़ने की प्रक्रिया शामिल है। अनुवादक ने यह भी बताया है कि प्राणायाम का अनुसरण करने वाले योगियों को कड़े नियमों का पालन करना पड़ता है, जिसमें कुछ आहारों का परहेज और नियमित अभ्यास शामिल हैं। हालांकि, यह भ्रांति है कि सामान्य गृहस्थ प्राणायाम नहीं कर सकते। प्राणायाम से न केवल शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार होता है, बल्कि मानसिक शांति और एकाग्रता में भी वृद्धि होती है। डा. आटेब ने अपनी पुस्तक में प्राणायाम के विज्ञान को स्पष्ट किया है, यह बताते हुए कि यह केवल अधिक ऑक्सीजन प्राप्त करने का साधन नहीं है, बल्कि फेफड़ों को मजबूत बनाने और शरीर के स्वास्थ्य को बनाए रखने का एक तरीका है। वे यह भी बताते हैं कि प्राचीन काल से प्राणायाम का उपयोग विभिन्न रोगों के उपचार के लिए किया जाता रहा है। पुस्तक में प्राणायाम के अभ्यास के फायदों के साथ-साथ इसके वैज्ञानिक पहलुओं को भी उजागर किया गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यह एक प्रभावी स्वास्थ्य साधन है जो आधुनिक चिकित्सा के सिद्धांतों के साथ भी संगत है।
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