चिकित्सा चन्द्रोदय दूसरा भाग | Chikitsa Chandroday (Part 2)

By: बाबू हरिदास वैध - Babu Haridas Vaidhya
चिकित्सा चन्द्रोदय दूसरा भाग | Chikitsa Chandroday (Part 2) by


दो शब्द :

यह पाठ एक भावनात्मक और व्यक्तिगत लेख है जिसमें लेखक अपनी रुग्णता के बीच अपने पिता की चिकित्सा में उनके योगदान का उल्लेख कर रहा है। लेखक अपने पिता, जो चिकित्सा के क्षेत्र में प्रसिद्ध थे, की बीमारी और उनके द्वारा किए गए परिश्रम को याद करता है। वह बताता है कि उनके पिता ने हजारों पुस्तकें लिखीं और "चिकित्सा-चन्द्रोदय" नामक महाग्रंथ को तैयार करने में बहुत मेहनत की, जिसके चलते उनके स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा। पिता की वर्तमान स्थिति, जहाँ वह खुद एक मरीज हैं, लेखक को परेशान कर रही है। वह बताते हैं कि कैसे पिता के ज्ञान और नुस्खों का उपयोग करके वह दूसरों की चिकित्सा करते हैं, लेकिन आज वे खुद बीमार हैं। लेखक अपने पिता के प्रति अपनी चिंता और उनके स्वास्थ्य के प्रति अपने दर्द को साझा करता है। अंत में, लेखक पाठकों से निवेदन करता है कि यदि उनकी कोई गलती नजर आए, तो तुरंत उसे उनकी जानकारी में लाएं, ताकि वे उसे सुधार सकें। यह लेख भावनाओं, चिंता और परिवार के प्रति जिम्मेदारी का एक गहरा चित्रण प्रस्तुत करता है।


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