बनौषधि - चंद्रोदय | Banoushadhi - Chandroday

By: चन्द्रराज भंडारी विशारद - Chandraraj Bhandari Visharad


दो शब्द :

इस पाठ में भारतवर्ष के ओसवाल समाज के एक प्रमुख व्यक्ति, सेठ सागरमलजी चूँकड़ का परिचय दिया गया है। उन्होंने अपने व्यापारिक, सामाजिक और धार्मिक योगदान से समाज में महत्वपूर्ण स्थान बनाया। सेठ सागरमलजी ने कम उम्र में अपने व्यवसाय की शुरुआत की और धीरे-धीरे अपनी मेहनत और प्रतिभा के बल पर एक सफल व्यापारी बने। उनके व्यवसाय में सफलता के साथ-साथ उन्होंने समाज सेवा के कार्यों में भी बढ़-चढ़कर भाग लिया। उन्होंने जलगाँव में विभिन्न संस्थाओं की स्थापना की, जैसे कि श्री सागर धर्मार्थ औषधालय, जहां लोगों को मुफ्त औषधियाँ उपलब्ध होती हैं। इसके अलावा, उन्होंने पांजरापोल संस्था का भी संचालन किया, जो पशुओं की देखभाल करती है। धार्मिक और सामाजिक कार्यों में उनकी रुचि ने उन्हें जलगाँव के ओसवाल समाज में एक महत्वपूर्ण नेता बना दिया। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया, कन्या विद्यालय की स्थापना की और विभिन्न जैन और अजैन संस्थाओं को दान दिया। सेठ सागरमलजी ने स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूकता दिखाई और एक व्यायामशाला की स्थापना की। उनका जीवन परिश्रम, दानशीलता और समाज के प्रति जिम्मेदारी का उदाहरण प्रस्तुत करता है। उनके चार पुत्र भी उनके नक्शेकदम पर चलकर समाज सेवा और व्यापार में सक्रिय हैं। सेठ सागरमलजी का जीवन इस बात का प्रमाण है कि मेहनत और सेवा के माध्यम से समाज में एक स्थायी प्रभाव छोड़ा जा सकता है।


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