नादिदारपन | Nadidarpan

- श्रेणी: Ayurveda | आयुर्वेद Health and Wellness | स्वास्थ्य
- लेखक: अज्ञात - Unknown
- पृष्ठ : 76
- साइज: 4 MB
- वर्ष: 1893
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दो शब्द :
इस पाठ में विभिन्न विषयों का उल्लेख किया गया है, जिनमें मुख्य रूप से रामायण, नाड़ी विज्ञान और चिकित्सा के सिद्धांत शामिल हैं। पहले भाग में रामायण की विशेषता और उसके पाठ की महत्ता को बताया गया है, जिसमें तुलसीदास जी के जीवन और उनके कार्यों का उल्लेख किया गया है। यह स्पष्ट किया गया है कि रामायण पढ़ने से आत्मिक सुख और ज्ञान की प्राप्ति होती है। दूसरे भाग में नाड़ी विज्ञान पर चर्चा की गई है। नाड़ी की गति, उसकी परीक्षा, और विभिन्न रोगों का निदान करने के लिए नाड़ी की स्थिति का अध्ययन करना महत्वपूर्ण बताया गया है। नाड़ी के विभिन्न प्रकार, जैसे वात, पित्त और कफ, के बारे में भी जानकारी दी गई है। नाड़ी की स्थिति और उसकी गति से संबंधित विभिन्न सिद्धांतों का वर्णन किया गया है, जिससे यह समझा जा सके कि कैसे नाड़ी के माध्यम से शरीर की स्वास्थ्य स्थिति का पता लगाया जा सकता है। अंत में, नाड़ी के परीक्षण की विधि और इसके महत्व पर जोर दिया गया है। नाड़ी की गति और उसके संकेतों के माध्यम से रोग की पहचान और उपचार की प्रक्रिया को समझाने का प्रयास किया गया है। इस प्रकार, पाठ में रामायण और नाड़ी विज्ञान दोनों के महत्व को दर्शाया गया है।
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