नूतन पर्यायवाची एवं विपयोय कोश | Nootan Paryayvachi evam Viprayay Kosh

- श्रेणी: Grammar/व्याकरण भाषा / Language हिंदी / Hindi
- लेखक: डॉ.बदरीनाथ कपूर - Dr. Badarinath Kapoor
- पृष्ठ : 421
- साइज: 14 MB
- वर्ष: 1991
-
-
Share Now:
दो शब्द :
इस पाठ में हिंदी भाषा में पर्यायवाची शब्दों के कोशों के विकास और उनकी विशेषताओं पर चर्चा की गई है। पाठ की शुरुआत में पहले हिंदी पर्यायवाची कोश के प्रकाशन का उल्लेख किया गया है, जिसे श्रीकृष्ण शुक्ल विशारद ने संपादित किया था। यह कोश प्राचीन भारतीय शब्दकोश पद्धति पर आधारित था, जबकि अन्य कोशें पाश्चात्य अक्षरक्रम पद्धति का अनुसरण करती थीं। पाठ में बताया गया है कि पर्यायवाची कोशों में शब्दों को विषय के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है, जो खोजने में अधिक समय और श्रम की आवश्यकता होती है। शुक्ल जी के कोष के चार खंडों में 2250 पर्यायमालाएँ थीं, लेकिन उसमें कुछ कमियाँ भी थीं। इसके बाद, भोलानाथ तिवारी का कोश आया, जिसमें कुछ सुधार किए गए थे, लेकिन मूल ढांचा वही रहा। अंत में, अभिनव पर्यायवाची कोश का उल्लेख किया गया है, जिसमें शब्दों को अक्षरक्रम से प्रस्तुत किया गया। पाठ में यह भी बताया गया है कि पर्यायों के निर्धारण में सावधानी बरतनी चाहिए, ताकि अर्थगत समानता बनी रहे। पाठ में विभिन्न कोशों की कार्यप्रणाली और उनके सुधार के सुझाव दिए गए हैं। इस प्रकार, पाठ में हिंदी पर्यायवाची कोशों के विकास, उनके उपयोगिता, और संभावित सुधारों पर विचार विमर्श किया गया है।
Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.