ब्रह्म संहिता | Brahma Samhita

By: उपाध्याय नन्दलाल शर्मा - Upadhyay Nandlal Sharma


दो शब्द :

इस पाठ में आयुर्वेद के महत्व, उसके सिद्धांतों और मानव जीवन पर उसके प्रभाव के बारे में चर्चा की गई है। लेखक ने आयुर्वेद को चार मूलभूत पदार्थों का ज्ञान और उनकी साधना का माध्यम बताया है। उन्होंने आयुर्वेद की परंपरा का उल्लेख करते हुए यह भी बताया है कि वर्तमान समय में विज्ञान और अन्य विद्याओं में नए विचारों का विकास हो रहा है, जबकि आयुर्वेद में नवीनतम शोध और विचारों का अभाव है। लेखक ने आयुर्वेद के इतिहास को समझाने के लिए विभिन्न युगों का उल्लेख किया है, जिसमें बताया गया है कि कैसे पहले के समय में ऋषियों ने मानवता की आवश्यकताओं को समझकर आयुर्वेद की स्थापना की। उन्होंने यह भी बताया कि आयुर्वेद का उपयोग केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नहीं, बल्कि मानसिक और आध्यात्मिक विकास के लिए भी किया जाता है। इसमें मानव जीवन के चार उद्देश्य - धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति के लिए आयुर्वेद के सिद्धांतों का समावेश किया गया है। लेखक ने यह भी उल्लेख किया है कि आयुर्वेद का अध्ययन करने से व्यक्ति को शांति, सुख, और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। अंत में, उन्होंने पाठकों को इस ज्ञान का लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया है।


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