पाश्चात्य दर्शन | Pashchatya Darshan

- श्रेणी: दार्शनिक, तत्त्वज्ञान और नीति | Philosophy
- लेखक: ब्रह्मस्वरुप अग्रवाल - Brahmswaroop Agrawal
- पृष्ठ : 323
- साइज: 12 MB
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दो शब्द :
इस पाठ में पाश्चात्य दर्शन का एक समसामयिक अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। लेखक डॉ. ब्रह्म स्वरूप अग्रवाल ने इस पुस्तक को लिखकर पाश्चात्य दर्शन से संबंधित प्रमुख समस्याओं और उनके समाधान पर विचार किया है। उन्होंने इस कार्य के माध्यम से हिंदी में पाश्चात्य दर्शन के अध्ययन के लिए आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने का प्रयास किया है, जो कि भारतीय भाषाओं में अभी तक पर्याप्त रूप से नहीं थी। पुस्तक में पाश्चात्य दार्शनिकों के विचारों का विस्तृत अध्ययन किया गया है, जिसमें जीवन, जगत, और ईश्वर से संबंधित समस्याओं पर उनके दृष्टिकोण को समाहित किया गया है। लेखक ने विभिन्न दार्शनिक विचारों को स्पष्ट और सरल भाषा में प्रस्तुत किया है, जिससे यह पुस्तक विशेष रूप से बी.ए. के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी हो सके। पुस्तक की भाषा परिष्कृत और सुबोध है, जिससे पाठक आसानी से दार्शनिक अवधारणाओं को समझ सकें। इसके अलावा, लेखक ने अपने स्वतंत्र विचार भी प्रस्तुत किए हैं, जो उनके गहन दार्शनिक चिंतन और मौलिक प्रतिभा का परिचय देते हैं। अंत में, यह पुस्तक केवल पाश्चात्य दर्शन का इतिहास नहीं है, बल्कि यह पाश्चात्य दार्शनिक सिद्धांतों का विवेचन है। यह पुस्तक हिंदी में पाश्चात्य दर्शन के अध्ययन के लिए एक महत्वपूर्ण योगदान है और इससे भारतीय विद्या के छात्रों को लाभान्वित होने की उम्मीद है।
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