अनुभूता चिकित्सा सागरा | Anubhoota Chikitsa Sagara

By: गंगा प्रसाद - Ganga Prasad
अनुभूता चिकित्सा सागरा | Anubhoota Chikitsa Sagara by


दो शब्द :

पाठ का सारांश इस प्रकार है: यह ग्रंथ विभिन्न औषधियों, उनके गुणों और उपयोगों के बारे में जानकारी प्रदान करता है। इसमें प्राचीन आयुर्वेदिक चिकित्सा प्रणाली का उल्लेख किया गया है, जिसमें विभिन्न रोगों के उपचार के लिए औषधियों का उपयोग किया जाता है। ग्रंथ में बताया गया है कि परमेश्वर ने संसार को स्वस्थ रखने के लिए औषधियों का निर्माण किया है, जिनसे मानव जीवन में स्वास्थ्य और सुख की प्राप्ति होती है। ग्रंथ में विभिन्न ऋषियों और चिकित्सकों के योगदान का भी उल्लेख है, जिन्होंने औषधियों के गुण और उपयोग को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसमें आयुर्वेद के चार प्रमुख स्तंभों - धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष - का उल्लेख किया गया है, जो मानव जीवन के चार महत्वपूर्ण पहलू हैं। लेखक ने ग्रंथ में औषधियों की पहचान, उनके विभिन्न प्रकार, गुण एवं उपयोग के साथ-साथ रोगों के उपचार के तरीकों का विस्तार से वर्णन किया है। यह ग्रंथ न केवल चिकित्सा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह एक सांस्कृतिक और ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है, जो प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के प्रति जागरूकता बढ़ाता है। ग्रंथ के अंत में लेखक ने उन सभी विद्वानों और चिकित्सकों का धन्यवाद किया है जिन्होंने इस ग्रंथ को बनाने में सहयोग दिया और इसके प्रचार-प्रसार में योगदान किया।


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