प्राणयाम-रहश्य | Pranayam- Rahasya

- श्रेणी: Health and Wellness | स्वास्थ्य योग / Yoga
- लेखक: स्वामी सर्वानन्द सरस्वती - Swami Sarvanand Sarsvati
- पृष्ठ : 234
- साइज: 2 MB
- वर्ष: 1951
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दो शब्द :
इस पाठ का सारांश इस प्रकार है: पुस्तक का उद्देश्य स्वास्थ्य और प्राणायाम पर ध्यान केंद्रित करना है, खासकर वर्तमान समय में जब लोग स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो रहे हैं। लेखक ने प्राचीन ऋषियों द्वारा विकसित प्राणायाम के महत्व को उजागर किया है। प्राणायाम को सांस लेने और छोड़ने की क्रिया के माध्यम से जीवन शक्ति को नियंत्रित करने की एक विधि के रूप में प्रस्तुत किया गया है। यह केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति के लिए भी महत्वपूर्ण है। लेखक ने बताया है कि प्राणायाम का अभ्यास करने से व्यक्ति अपनी प्राण शक्ति को बढ़ा सकता है और दीर्घायु प्राप्त कर सकता है। पुस्तक में प्राणायाम की विभिन्न विधियों और उनके लाभों का विस्तार से वर्णन किया गया है। यह भी बताया गया है कि प्राणायाम का अभ्यास किसी अनुभवी व्यक्ति की देखरेख में करना चाहिए ताकि सही तरीके से इसका लाभ लिया जा सके। प्राणायाम के अभ्यास से मन और शरीर में संतुलन स्थापित होता है, और यह मानसिक और आध्यात्मिक विकास में भी सहायक होता है। इस प्रकार, प्राणायाम न केवल शारीरिक स्वास्थ्य का साधन है, बल्कि यह आत्मिक ऊर्जा को भी संचारित करता है, जिससे व्यक्ति में नई ऊर्जा और स्फूर्ति का संचार होता है। पाठक को सलाह दी गई है कि वे प्राणायाम का अभ्यास अपनी शारीरिक और मानसिक जरूरतों के अनुसार करें और इससे होने वाले लाभों का अनुभव करें।
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