पिता का पत्र पुत्री के नाम | Pita ka Patra Putri ke Naam

By: पंडित जवाहरलाल नेहरू - Pt. Javaharlal Neharu
पिता का पत्र पुत्री के नाम | Pita ka Patra Putri ke Naam by


दो शब्द :

यह पाठ इन्द्र को लिखे गए पत्रों का संग्रह है, जो उनके पिता जवाहरलाल नेहरू ने अपनी पुत्री इन्दिरा के लिए लिखा था। ये पत्र उस समय के हैं जब इन्दिरा मसूरी में थीं और नेहरू इलाहाबाद में। पत्रों में नेहरू ने इन्दिरा को संसार और उसके विभिन्न देशों के बारे में जानने के लिए प्रोत्साहित किया है। उन्होंने बताया कि दुनिया की जानकारी के लिए सिर्फ भारत या इंग्लैंड तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि सभी जातियों और देशों का ज्ञान होना चाहिए। नेहरू ने पत्रों में यह भी उल्लेख किया है कि कैसे पृथ्वी का इतिहास बहुत पुराना है और प्रारंभ में यहाँ कोई जीव-जंतु नहीं थे। उन्होंने विज्ञान और पुरातत्त्व के माध्यम से यह समझाने की कोशिश की कि कैसे जानवरों और फिर मनुष्यों का विकास हुआ। उन्होंने बताया कि हमें प्रकृति के विभिन्न पहलुओं को समझकर, जैसे पहाड़, नदियाँ और जानवरों की हड्डियों के माध्यम से, पृथ्वी के इतिहास को जानने का प्रयास करना चाहिए। इन पत्रों का उद्देश्य न केवल व्यक्तिगत संवाद है, बल्कि यह अन्य बच्चों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बनना है। नेहरू ने आशा व्यक्त की कि इन पत्रों को पढ़कर बच्चे एक बड़े परिवार के सदस्य की तरह महसूस करेंगे और विभिन्न देशों के लोगों के बीच वैमनस्य की भावना को मिटाने में मदद मिलेगी। अंत में, उन्होंने इन पत्रों के हिंदी अनुवाद के लिए प्रेमचंद का आभार व्यक्त किया।


Please share your views, complaints, requests, or suggestions in the comment box below.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *