संस्कृत व्याकरण शास्त्र का इतिहास | Sanskrit Vyakaran Shastra Ka Itihas

- श्रेणी: Grammar/व्याकरण इतिहास / History संस्कृत /sanskrit
- लेखक: पं. युधिष्ठिर मीमांसक - Pt Yudhishthir Mimansak
- पृष्ठ : 616
- साइज: 11 MB
- वर्ष: 1963
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दो शब्द :
इस पाठ में कर्नल वी. आर. मिराज़कर की शल्य चिकित्सा कौशल की प्रशंसा की गई है, जिन्होंने विद्वान् युधिष्ठिर मीमासक को पुनर्जीवित किया। लेखक ने विभिन्न विद्वानों और उनके योगदानों का उल्लेख करते हुए भारतीय संस्कृत साहित्य की समृद्धि और उसके संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया है। लेखक का मानना है कि भारतीय संस्कृत वाडूमय का इतिहास और उसके अध्ययन का कार्य अभी अधूरा है। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिमी विद्वानों ने भारतीय संस्कृति और इतिहास को ठीक से नहीं समझा है और उनके दृष्टिकोण में कई मिथक मौजूद हैं। इस संदर्भ में, युधिष्ठिर मीमासक द्वारा प्रस्तुत ग्रन्थ को महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि यह भारतीय ज्ञान परंपरा को सहेजने का प्रयास करता है। लेखक ने यह भी बताया है कि भारतीय प्राचीन इतिहास का अध्ययन और उसका सही विवरण आवश्यक है, ताकि भारतीय विद्या की रक्षा की जा सके। अंत में, लेखक ने इस ग्रन्थ के माध्यम से भारतीय संस्कृति और ज्ञान के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की और आशा जताई कि इससे भारत का गौरव बढ़ेगा।
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