मारवाड़ रा परगना री विगत | Marwad Ra Pargana Ri Vigt

- श्रेणी: Cultural Studies | सभ्यता और संस्कृति इतिहास / History भारत / India
- लेखक: मुहंता नैरासी - Muhanta Nairasi
- पृष्ठ : 628
- साइज: 19 MB
- वर्ष: 1968
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दो शब्द :
यह पाठ राजस्थान के इतिहास और संस्कृति पर आधारित एक महत्वपूर्ण ग्रंथ का परिचय देता है, जिसे मुहणोत नैणसी ने महाराजा जसवंत सिंह के समय में लिखा था। यह ग्रंथ मुख्य रूप से मारवाड़ क्षेत्र के परगनों का विस्तृत विवरण प्रस्तुत करता है, जिसमें भौगोलिक, ऐतिहासिक, आर्थिक, और सामाजिक जानकारी शामिल है। इस ग्रंथ का महत्व इसलिए है क्योंकि यह लगभग 300 वर्ष पहले तैयार किया गया था और इसके माध्यम से हमें उस समय के स्थानीय जीवन, प्रशासनिक व्यवस्था और कृषि के बारे में जानकारी मिलती है। इसमें प्रत्येक परगने का इतिहास, भौगोलिक स्थिति, प्रमुख कस्बों, जल संसाधनों, और खेती की जानकारी दी गई है। लेखक ने विभिन्न परगनों के गांवों का विस्तृत वर्णन किया है, जिसमें गांवों की स्थितियों, फसलों, सिंचाई के साधनों, और जल की उपलब्धता का उल्लेख है। इस प्रकार, यह ग्रंथ केवल गजेटियर के रूप में नहीं, बल्कि उस समय के सामाजिक और आर्थिक जीवन का एक जीवंत चित्र प्रस्तुत करता है। ग्रंथ का संपादन डॉ. नारायण सिंह भाटी ने किया है, जिन्होंने इसे अधिक उपयोगी बनाने के लिए परिशिष्ट तैयार किए हैं। यह ग्रंथ राजस्थान के इतिहास के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री प्रदान करता है। इसका प्रकाशन राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान द्वारा किया गया है और इसे आधुनिक युग की आवश्यकताओं के अनुसार तैयार किया गया है।
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